Panchkula Special

बढ़ा टकराव: मेयर व पार्षद ही पहुंचे मीटिंग में

मेयर बोलीं, अफसर न भी आएं, वैध होगी मीटिंग, अदालत की है रूलिंग

19 जून की मीटिंग में भी नहीं आया था निगम से कमिश्नर समेत कोई अफसर

लोकेश चड्ढा.पंचकूला। नगर निगम हाउस की मीटिंग बुधवार को यहां रेड बिशप के कमेटी रूम में मेयर उपिंदर आहलुवालिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई। मीटिंग में 15 पार्षदों ने हिस्सा लिया, लेकिन हाजिरी 12 ने ही दर्ज कराई।

खास बात यह रही कि नगर निगम के कमिश्नर डॉ. शालीन समेत कोई भी अफसर मीटिंग में नहीं पहुंचा। लिहाजा प्रोसीडिंग रजिस्टर नया लगाया गया, क्योंकि पहले से ही चला आ रहा प्रोसीडिंग रजिस्टर निगम के अफसरों द्वारा मीटिंग में नहीं भेजा गया था। मीटिंग में मौजूद पार्षदों ने कहा था कि प्रोसीडिंग दर्ज करने के लिए नया रजिस्टर लगाया जाए।

जो मीटिंग बुधवार को हुई, पहले यही मीटिंग 19 जून को होनी थी और मेयर व पार्षद पहुंच गए थे, लेकिन ऐन मौके पर कमिश्नर के न आ पाने का मैसेज मिला और मीटिंग स्थगित कर दी गई थी। इसी के साथ ही निगम में चुने हुए नुमाइंदों खासकर मेयर उपिंदर आहलुवालिया व अफसरों खासकर कमिश्नर डॉ. शालीन के बीच टकराव बढ़ गया है।

ये 15 पार्षद आए मीटिंग में: मेयर उपिंदर आहलुवालिया,  सीनियर डिप्टी मेयर एस.एस. नंदा, भावना गुप्ता, लिली बावा, रविकांत स्वामी, दलबीर कौर, कांता देवी, कुलजीत वड़ैच, सोमनाथ, ममता मित्तल, सीमा देवी, सुरजीत कौर, सलीम खान, सतिंदर टोनी, विनोद कुमार। इनमें सतिंदर टोनी, विनोद कुमार और सलीम खान ने पूरी मीटिंग अटेंड तो की, लेकिन हाजिरी दर्ज नहीं कराई। खास बात ये है कि सलीम खान और टोनी ने अपने-अपने वार्डों के इश्यूज भी मीटिंग में रखे। भाजपा से पार्षद और डिप्टी मेयर सुनील तलवार व पार्षद सी.बी. गोयल मीटिंग में नहीं पहुंचे। तीनों मनोनीत पार्षद भी मीटिंग से दूर रहे, जबकि मनोनीत पार्षद 19 जून की मीटिंग में मौजूद थे।

मेयर उपिंदर आहलुवालिया समेत अधिकांश पार्षद मीटिंग के लिए तय समय 10 बजे तक रेड बिशप पहुंच गए थे। सतिंदर टोनी, विनोद कुमार और सलीम खान करीब 10.35 बजे मीटिंग में पहुंचे। इस दौरान निगम से न तो कमिश्नर और न ही कोई अन्य अधिकारी पहुंचा।

मेयर ने मीटिंग शुरू करते हुए एजेंडा शीट से एक-एक कर इश्यूज़ को पार्षदों के समक्ष रखा। अधिकांश इश्यूज़ सहमति से पारित हुए। तीन इश्यूज़ के लिए निगम अधिकारियों की सहमति जरूरी थी और उनकी गैर-हाजिरी के चलते वे इश्यूज़ पारित नहीं हो पाए। एजेंडे में ओमवती पूनिया का एक इश्यू था, जो मेयर ने उठाया भी, लेकिन पार्षद रविकांत स्वामी ने कहा कि जब ओमवती पूनिया खुद ही मीटिंग में नहीं आर्इं तो उनका इश्यू भी डिस्कस नहीं होना चाहिए। मीटिंग के बाद मेयर उपिंदर DSC_5646आहलुवालिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि 19 जून की मीटिंग में  निगम कमिश्नर डॉ. शालीन यह कहते हुए नहीं आए थे कि वे शहर से बाहर और अस्वस्थ हैं, लेकिन आज वे शहर में प्रेजेंट होते हुए भी हाउस की मीटिंग में एब्सेंट हैं।  इसे यही साबित होता है कि वे लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते।

मेयर बरसीं कमिश्नर पर: मीडिया से बातचीत करते हुए मेयर ने कहा कि उनके बारे में यह गलत कहा जा रहा है कि उन्होंने निगम कमिश्नर डॉ. शालीन को धमकाया है। ऐसी कोई बात नहीं हुई। 19 जून की मीटिंग में कमिश्नर के न पहुंचने पर मैंने उनसे आग्रह किया था कि अगर वे नहीं आ सकते तो ज्वाइंट कमिश्नर की ड्यूटी लगा दें। इससे पहले ऐसा हो चुका है कि निगम कमिश्नर की गैर-हाजिरी में ज्वाइंट कमिश्नर मीटिंग कंडक्ट करते रहे हैं।

निगम कमिश्नर ने कहा कि वे ज्वाइंट कमिश्नर को नहीं भेजेंगे और यह मीटिंग कैंसल करते हुए नई मीटिंग, नए एजेंडे के साथ कॉल करेंगे। मेयर ने कहा कि वह शहर की बेहतरी के लिए काम कर रही हैं और उन पर उनके किसी नजदीकी रिश्तेदार की शह होने का आरोप सरासर गलत है, क्योंकि बीते चार सालों में उन्होंने यह साबित किया कि वह किसी ‘प्रभाव’ में काम नहीं करतीं। मेयर ने कहा कि बुधवार की मीटिंग की प्रोसीडिंग सरकार को भेज कर इस पर अमल के लिए आग्रह किया जाएगा। हाउस मीटिंग में वही इश्यूज़ रखे जाते, जो शहर की भलाई के होते हैं।

मेयर उपिंदर आहलुवालिया ने ‘पंचकूला सिटी न्यूज7’ को बताया कि गुजरात हाईकोर्ट की रूलिंग है कि अगर निगम हाउस की मीटिंग में चीफ अफसर गैर-हाजिर हों या मीटिंग में आने से इन्कार करें तो चुने हुए नुमाइंदे मीटिंग कर सकते और ऐसी मीटिंग वैध मानी जाएगी। हाईकोर्ट का कहना है कि चीफ आॅफिसर की मौजूदगी से मीटिंग की वैधता का कोई सरोकार नहीं है।

मेयर साहिबां, कोई हवन-यज्ञ करवाओ। न जाने किस कलमुए की नजर लग गई है नगर निगम पंचकूला को। पिछले साल 25 अक्तूबर को निगम हाउस की बैठक बुलाई गई और तब बैठक शुरू होने के चंद मिनट बाद ही नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर ललित सिवाच व अन्य अधिकारी सरकारी रजिस्टर साथ लेकर बैठक का बायकाट कर गए थे। तब से लेकर अब तक बैठक नहीं हुई और जब 19 जून की बैठक का एजेंडा सामने आया तो शहर के लोगों ने सुकून की लम्बी सांस ली। उम्मीद जगी की कमिश्नर नए आए और माहौल नया है। बीच में कई अफसर भी बदल गए सो अबकी बार बैठक जरूर सुखद माहौल में सम्पन्न होगी और कई ऐसे एजेंडे पारित होंगे जो आम आदमी के लिए बड़े सुकून भरें होंगे, लेकिन हुआ फिर वही जो नहीं होना चाहिए था। -संपादक