आड़े आ रही पैसों की तंगी, चाहता अब नगर निगम ही लगाए 
लोकेश चड्ढा /पंचकूला। जी हां, यह सच है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पैसों की तंगी झेल रहा और नौबत यहां तक आ गई है कि इस बार ‘स्प्रिंग फेस्ट’ लगाने के मूड में भी नहीं है। वजह साफ है कि स्प्रिंग फेस्ट पर खर्चा ज्यादा होता और आमदनी कम रहती है।
जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण के मुख्यालय ने हाल ही में हॉर्टिकल्चर विंग को लिखा है कि शहर के सभी सेक्टर विकास और रखरखाव के लिए नगर निगम पंचकूला को सौंपे जा चुके हैं। लिहाजा, नगर निगम पंचकूला से कहा जाए कि ‘स्प्रिंग फेस्ट’ का आयोजन वे करें। दो दिन का यह मेला आम तौर पर मार्च के पहले सप्ताह में शनि-रविवार को लगता रहा है। यह परंपरा 1986 से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण निभाता आ रहा है। जानकारी के अनुसार, पिछले साल 33वां स्प्रिंग फेस्ट 8 और 9 मार्च को लगाया गया था। तब खर्चा करीब 22 लाख रुपए आया और आमदनी तकरीबन 4 लाख रुपए हुई थी। आमदनी कम रहने की वजह ये महसूस की गई कि जो स्टॉल दो दिन के लिए किराए पर दिए जाते, उसके एवज में पर्याप्त पैसा नहीं मिलता है। कई बार तो तेज बारिश या अंधड़ की वजह से स्टॉल लगाने वालों का धंधा भी नहीं चलता, टैंट आदि तो फटते/उखड़ते हैं ही।
अब सुनने में आ रहा है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पंचकूला के प्रशासक महावीर कौशिक का ऑफिस नगर निगम पंचकूला को तर्कसंगत आधार देकर ‘स्प्रिंग फेस्ट’ लगाने का आग्रह करेगा। आगे निगम की मर्जी है कि वे स्प्रिंग फेस्ट लगाने की जहमत उठाए या न। वजह साफ है कि निगम के पास भी फंड्स कोई बहुत ज्यादा नहीं हैं। इसी कारण पिछले दिनों अनुबंध पर काम कर रहे करीब 250 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गईं, क्योंकि खजाने पर बोझ ज्यादा पड़ रहा था। उधर, निगम को हाउस/प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में भी अभी ज्यादा पैसा नहीं मिल रहा। अब देखने वाली बात ये है कि नगर निगम स्प्रिंग फेस्ट की जिम्मेदारी लेता है या नहीं। वजह साफ है कि निगम के पास फंड्स और स्टाफ बहुत ज्यादा नहीं है। दूसरे, निगम ने ऐसे काम कभी किए नहीं हैं। जाहिर है कि अगर निगम ने स्प्रिंग फेस्ट के आयोजन की जिम्मेदारी ओटने से मना किया तो पंचकूलावासियों को इस साल स्प्रिंग फेस्ट का मजा लेने का मौका नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि पंचकूला में ‘स्प्रिंग फेस्ट’ को मेले का नाम दिया जाता और हजारों लोग इसे एंजॉय करते रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से ताजा और सूखे फूलों के कंपीटिशंस के साथ-साथ रंगोली, पेंटिंग, फैंसी ड्रेस, बेबी शो, कवि दरबार जैसे कई मनोरंजक कंपीटिशंस भी कराए जाते रहे हैं।

  • एचएसवीपी मुख्यालय ने लिखा है कि जब पंचकूला के सेक्टर विकास और रखरखाव के लिए नगर निगम को सौंपे जा चुके तो स्प्रिंग फेस्ट भी निगम ही लगाए।
  • 1986 से ‘स्प्रिंग फेस्ट’ एचएसवीपी लगाता आया है। पिछले साल 33वें मेले में खर्चा लगभग 22 लाख और आमदनी करीब 4 लाख हुई थी। यानी, 18 लाख का घाटा।
  • एचएसवीपी पिछले कुछ सालों से वित्तीय संकट में चल रहा और इसी वजह से मुख्यालय ने हॉर्टिकल्चर विंग को लिखा कि नगर निगम से मेला लगाने को कहें।
  • अभी तय होना बाकी है कि नगर निगम ‘स्प्रिंग फेस्ट’ लगाएगा या नहीं।