Panchkula

सच में…सेक्टरों में सुरक्षा गेट न होते तो नुकसान होता ज्यादा

जिन सेक्टरों में नहीं हैैं गेट, उन्हें भी लगवा लेने चाहिएं जल्द

लोकेश चड्ढा, पंचकूला। नगर निगम के उन पार्षदों का धन्यवाद जिन्होंने पहल कर अपने अधिकार क्षेत्र में लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए बीते अर्से में मोहल्लों के एन्ट्री प्वाइंट्स लोहे के ‘गेट’ लगवा दिए। वही गेट 23 से 25 अगस्त को बड़े काम के साबित हुए, जब डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों ने पहले शहर के सेक्टरों में ठिकाने बनाने की कोशिश और बाद में बाबा को दोषी करार देने के बाद उपद्रव मचाते हुए कुछ सेक्टरों में घुसने की कोशिश की।

tannअब लोगों को महसूस हुआ कि अगर उनके मुहल्लों पर ये गेट न होते तो बाबा के चेले उनके यहां भी तोड़-फोड़  के साथ जान-माल का नुक्सान कर सकते थे। बचाने के लिए पुलिस भी काम न आती, क्योंकि पुलिस मुख्य सड़कों पर उत्पात मचाने वालों के साथ भी सरकार के ‘इशारे’ की वजह से बहुत हद तक नरमी बरतती रही। यही वजह है कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘राजनीतिक स्वार्थ के लिए सरकार ने डेरे के समर्थकों पर नरमी बरती।’

कुल मिलाकर उन सेक्टरों के लिए सबक है कि वे भी अपने यहां गेट लगवाएं, भले ही खर्चा जेब पर भारी पड़ता है। गेट लगवाना इसलिए जरूरी है कि जैसे हालात 25 अगस्त को बाबा के चेलों द्वारा मचाए उत्पात से बने, कभी भी, कहीं भी बन सकते और वही गेट जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, वर्ना चंद मिनटों में कई घरों को वो नुक्सान झेलना पड़ सकता, जिसकी कभी कोई  कल्पना भी नहीं कर सकता।

याद करना जरूरी है कि हरियाणा सरकार के ‘इशारे’ पर पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों ने बाबा राम रहीम के समर्थकों के उत्पात मचाने पर तत्परता दिखाते हुए तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की। नतीजतन पंचकूला जैसे शांत शहर में जो अशांति देखने को मिली, लोग आसानी से नहीं भूल सकेंगे। पंचकूला धूं-धूं कर जला। 32 लोगों की मौत हुई। करीब 300 लोग जख्मी हुए। करीब 100 वाहन फूंके गए। इतनी ही बिल्डिंगों में तोड़-फोड़ की गई।

जब अर्द्धसैनिक बलों ने उपद्रवियों पर ओपन फायरिंग की तो जान बचाने के लिए उपद्रवी सेक्टरों की तरफ भागे। इससे पहले ही ज्यादातर सेक्टरों के गेट जान-माल के नुक्सान से बचने के लिए बंद कर लिए गए थे। गेट बंद थे,  तभी तो उपद्रवी सेक्टर 5 स्थित कैक्टस गार्डन के लाइट पॉइंट से सेक्टर 8 और 9 की  डिवाइडिंग रोड से होते हुए महाराजा अग्रसेन चौक (सेक्टर 16/17/8/9) की तरफ बढ़े और पहले चौक को तोड़ा और फिर आगे पल्लवी होटल, एचडीएफसी बैंक और फिर अग्रवाल भवन को नुक्सान पहुंचाया। अगर कहीं बीच रास्ते सेक्टर 8 और 9 और आगे सेक्टर 16 में सुरक्षा के लिए लगे  गेट खुले रह जाते तो कितना नुक्सान और हो जाता, आप सहज अंदाज लगा        सकते हैं।

सेक्टर-2,4,6,7,8,9,11,12ए,15,16,17,21 समेत कई सेक्टरों में मोहल्लों के एन्ट्री प्वाइंट्स पर लोहे के भारी-भरकम गेट लगे हुए हैं। ये गेट स्थानीय परिवारों के कंट्रीबूशन से लगाए गए और इन्हें लगवाने में स्थानीय पार्षदों ने अहम भूमिका निभाई।