Panchkula Special

एमएलए साब, अब आप कुछ करो वर्ना 12/12ए का अंडरपास उलझ ही गया है

 

  सेक्टर 20 के अंडरपास पर बहुत लगता है जाम, लोग होते परेशान

कपिल चड्ढा, पंचकूला। यहां सेक्टर 12/12ए की डिवाइडिंग रोड पर बनने वाला अंडरपास और उलझ गया है। अब बात बनेगी तो स्थानीय विधायक ज्ञानचंद गुप्ता के माध्यम से। गुप्ता को सारे हालात के बारे में फिर से मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बताना होगा। मुख्यमंत्री सहमत हो गए तो वे फिर से एनएचएआई के खाते से प्रस्तावित अंडरपास बनवाएं या फिर स्टेट गवर्नमेंट के फंड से अथवा हुडा या नगर निगम को कह कर।

कुल मिलाकर अंडरपास तभी बन पाएगा जब मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करेंगे और इसके लिए जोर लगाना होगा विधायक ज्ञानचंद गुप्ता को। प्रॉब्लम ये है कि एनएचएआई 1.2 किलोमीटर के दायरे में 3 नए अंडरपास बनाने को राज़ी नहीं। उधर, पीडब्लूडी भी राज़ी नहीं। हुडा हाथ खड़े किए हुए और नगर निगम भी इस पोजीशन में नहीं कि अंडरपास बनवा सके।

याद करें कि जिला प्रशासन के स्तर पर गठित कई विभागों की कमेटी द्वारा किए गए सर्वे के बाद सेक्टर 20 के अंडरपास पर ट्रैफिक जाम खत्म करने के लिए सेक्टर 12/12ए, करीब 100 मीटर आगे एक और अंडरपास तथा सेक्टर 12ए व इंडस्ट्रियल एरिया की रोड पर अंडरपास देने पर सहमति बनी थी। कमेटी में एनएचएआई भी शामिल था। बाद में केंद्रीय परिवहन व हाईवेज़ मंत्री नितिन गडकरी ने बीते एक मई को पिंजौर में ‘सुक्खोमाजरी बाईपास’ के शिलान्यास मौके पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आग्रह पर सेक्टर 12/12ए का अंडरपास बनाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद से एनएचएआई में फाइल चली लेकिन चंद दिनों बाद एनएचएआई ने दिल्ली में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक बैठक के दौरान साफ मना कर दिया कि प्रस्तावित अंडरपास एनएचएआई नहीं बनाएगी। सरकार इसे हुडा या पीडब्ल्यूडी से बनवा सकती है। जानकारी के अनुसार, एनएचएआई से मीटिंग के मिनट्स आने के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित किया। इसे हुडा को रेफर किया गया लेकिन हुडा ने पल्ला झाड़ लिया कि उनके पास न तो एक्सपर्टाइज है, न फंड्स और न ही संबंधित सड़कें। फाइल वापस पीडब्ल्यूडी को चली गई। अब तक प्रस्तावित प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तक की लागत वहन करने को कोई राज़ी नहीं है। बताना जरूरी है कि पंचकूला में सड़कें हुडा ने बनाई लेकिन ज्यों ही नगर परिषद का गठन हुआ, काफी सड़कें परिषद को हैंडओवर कर दी गर्इं। बाद में निगम बनने पर बकाया सड़कें भी दे दी गर्इं। अब बहुत थोड़ी सड़कें हुडा के पास बचीं और वे उस एरिया की हैं, जहां अभी रखरखाव के लिए निगम का अधिकार क्षेत्र नहीं है। लब्बोलुआब ये है कि सेक्टर 12/12ए का अंडरपास और दाएं-बाएं बनने वाले दो और अंडरपास फिलहाल हुडा,  एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, और नगर निगम के बीच ‘इमरती’ की तरह उलझ गए हैं।

सेक्टर 12/12ए के अंडरपास को बनाना जरूरी है क्योंकि सेक्टर 20 के अंडरपास पर आए दिन ट्रैफिक जाम लगने से लोग परेशान होते हैं। यह परेशानी तब से शुरू हुई जब से हाईवे की फोरलेनिंग के साथ अंडरपास बना है। 12/12ए का अंडरपास बनाना इसलिए भी जरूरी है कि जीरकपुर एरिया में गमाडा की ओर से बनाई जा रही ‘पीआर-7’ रोड को पीरमुछल्ला से सीधे हाउसिंग बोर्ड चौक मनीमाजरा को लिंक दिया जाना है। यह रोड चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, मोहाली और खरड़ तक कई किलोमीटर लंबा ‘कॉरिडोर’ के तौर पर बननी और इसके लिए संबंधित सरकारों के बीच पहले से ही सहमति बन चुकी है।