Panchkula Special

रिकवरी के नोटिस नहीं, हुडा देता है सीधे झटका

कपिल चड्ढा, पंचकूला। हुडा के प्लॉट होल्डर्स के लिए यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए कि अगर प्लॉट के एवज में हुडा की कोई देनदारी बकाया है तो इस्टेट आॅफिस से नोटिस मिलने का इंतजार न करें। हुडा के बाबू नोटिस नहीं, सीधे झटका देते हैं। झटका भी ऐसा कि अगर चंद दिनों में भुगतान न किया तो लाखों रुपए झट से खाते में जोड़ देते हैं। पता तब चलेगा जब आप भुगतान करने के लिए पहुंचेंगे।

जी हां, पंचकूला में ऐसा ही हो रहा है। आइए जानते हैं एक केस हिस्ट्री। एक बुजुर्ग अलॉटी ने 1996 में घग्गर पार एक कनाल का प्लॉट रिअलॉटमेंट में ज्वाइंटली (पति-पत्नी) के नाम खरीदा। प्लॉट के एवज में बकाया किस्तें 2009 तक चुकता कर इस्टेट आॅफिस से एनओसी ले लिया। वर्ष 2011 में हुडा ने एन्हांसमेंट के एवज में 10 लाख रुपए मांग लिए। तब अलॉटी के पास पैसा हाथ में नहीं था, क्योंकि पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाते हुए परिवार के पास जमा राशि खर्च हो चुकी थी। भुगतान नहीं किया तो हुडा के ब्याज का मीटर घूमकर 19 लाख रुपए तक पहुंच गया। यह रकम तो जैसे-तैसे अलॉटी ने जमा करवा दी। इसी बीच हुडा ने दिसंबर 2017 में नोटिस देकर एक्सटेंशन फीस (नॉन कंस्ट्रक्शन) के एवज में करीब 32 लाख रुपए  मांग लिए। नोटिस भी नवंबर के महीने की तारीख को जारी किया और ऐसा ड्राफ्टेड था कि 32 लाख रुपए को शब्दों में बयान नहीं किया गया। सीधे नुमेरिकल फिगर लिखी गई, जो बुजुर्गवार से नहीं पढ़ी गई। पहली नजर में लगा कि 3.23 लाख रुपए मांगे गए हैं। सोचा, थोड़े दिन बाद दे देंगे।

जब जनवरी के पहले हफ्ते में भुगतान करने पहुंचे तो बताया गया कि रिकवरी 32 लाख रुपए थी, जो अब 1 जनवरी को बढ़कर 62 लाख रुपए हो गई है। सुनकर बुजुर्गवार के पैरों तले जमीन तो खिसकी ही, हार्ट बीट भी बढ़ गई क्योंकि इतनी बड़ी रकम चुकता करना अब परिवार के बूते से बाहर है। इस संदर्भ में अलॉटी इस्टेट आॅफिसर से लेकर नीचे अकाउंट्स ब्रांच तक कइयों से मिला और बताया कि उन्हें वर्ष 2009 के बाद कभी एक्सटेंशन फीस (नॉन कंस्ट्रक्शन) के एवज में कोई नोटिस नहीं मिला।  पर… किसी ने भी राहत देना तो दूर, राहत मिलने तक की उम्मीद नहीं जताई। अब बुजुर्गवार परेशान हैं कि … प्लॉट का क्या बनेगा। कुल मिलाकर पंचकूला सिटी न्यूज7 हुडा के अलॉटियों को आगाह करना चाहता है कि अगर हुडा से प्लॉट लिया हुआ है तो समय-समय पर खुद इस्टेट आॅफिस जाकर प्लॉट के एवज में ड्यूज़ की जानकारी लेते रहें वर्ना हुडा का ‘मीटर’ तो घूम ही रहा है। समय रहते भुगतान न किया तो लाखों रुपए अतिरिक्त जेब से देने पड़ जाएंगे। बचना है तो खुद हुडा के संपर्क में रहें, क्योंकि आॅफिस में बाबुओं का टोटा है। ऐसे में हरेक देनदार अलॉटी को समय रहते ड्यूज़ का नोटिस भेजे जाना संभव भी नहीं लगता। सबक लेना होगा उपरोक्त केस हिस्ट्री से, वर्ना लाखों रुपए की चपत लगेगी एक्स्ट्रा।

लेडीज़ के नाम रियायत, पर जानकारी नहीं

हुडा, एक्सटेंशन फीस की वसूली के मामले में लेडीज़ अलॉटियों को 90 फीसदी रिबेट देता है। ऐसा हुडा की पॉलिसी में साफ लिखा है लेकिन इस बारे में जनसाधारण को न तो जानकारी है और न ही हुडा की तरफ से दी जाती है। जाहिर है कि अगर केस हिस्ट्री में जिस प्लॉट का जिक्र है, अलॉटी को जानकारी होती तो वह प्लॉट को पत्नी के नाम पर ट्रांसफर करवा लाखों रुपए की बचत कर सकता था। काश! हुडा के बाबू जनसाधारण का भला भी सोचें।