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निगम सर्वे की आॅथेंटिसिटी पर सवाल

2011 की जनगणना है कानूनन पुख्ता दस्तावेज

कपिल चड्ढा, पंचकूला। नगर निगम पंचकूला के चुनाव नजदीक आ रहे हैं। निगम ने नई वार्डबंदी करनी है क्योंकि अब तक के हालात में कालका और पिंजौर का निगम से अलग होना तय है।

नई वार्डबंदी के लिए निगम ने घर-घर में सर्वे के लिए एजेंसी लगा दी है। यह एजेंसी करीब 26 लाख रुपए लेकर महीने भर में रिपोर्ट पेश कर देगी कि किस घर में किस उम्र व जाति के कितने लोग रहते हैं। यानी, निगम के लिए नई वार्डबंदी के साथ वार्डों की रिजर्वेशन का काम आसान हो जाएगा। यहां सवाल उठता है कि कहीं निगम के खर्चे 26 लाख रुपए बेकार तो नहीं जाएंगे, क्योंकि 2011 की जनगणना जारी हो चुकी और वह कानूनन दस्तावेजी रिकॉर्ड भी है। इसे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट और पार्लियामेंट से लेकर संविधान तक सब कानूनन पुख्ता मानते हैं। जानकारी के अनुसार 2011 की जनगणना 1930 के बाद पहली बार जातिगत आधार पर जनसंख्या के आंकड़ों के साथ जारी हुई और कानूनन पुख्ता भी है। ऐसे में निगम के स्तर पर किसी प्राइवेट एजेंसी से कराए जाने वाले सर्वे की आॅथेंटिसिटी कितनी होगी और क्या इसे लीगल अथॉरिटीज़ स्वीकार करेंगी, सवाल खड़ा होता है। जाहिर हैै कि निगम को जो भी आंकड़े मिलेंगे, कानूनन विवाद भी उठेंगे और इन्हें सक्षम अदालत में चुनौतियां भी मिलेंगी। वजह भी साफ है कि जो भी एजेंसी सर्वे में लगाई गई, उसके वॉलंटियर्स कितनी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाएंगे, जो भी जानकारी मिलेगी, कितनी ईमानदारी से दर्ज करेंगे और जो भी जानकारी मिलेगी, लोगबाग कितनी ईमानदारी से देंगे, सरीखे… कई सवाल खड़े होते हैं। यूं मानिए कि हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट में दिए गए प्रावधान का महज फायदा लेते हुए सर्वे कराया जा रहा ताकि 2011 से लेकर 2018 (नए चुनाव की वार्डबंदी) के लिए ताजा आंकड़े जुटाए जा सकें।

गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों को नजरंदाज किया जा रहा, जोकि पुख्ता है। केंद्र सरकार की तरफ से हर नगर निगम/जिले को विभिन्न स्कीमों के तहत ग्रांटों का भुगतान ताजा जनगणना रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। ऐसे में किसी प्राइवेट एजेंसी का सर्वे किस हद तक मान्य होगा। इससे पहले नगर निगम करीब 67 लाख रुपए में हाउस टैक्स की बिलिंग का ठेका देकर विवादों में आ चुकी है। एजेंसी ने प्रॉपर सर्वे किए बिना बिल जारी करने शुरू कर दिए जो लोगों को बहुत अखरे। यहां तक कि मेयर उपिंदर आहलुवालिया के सेक्टर 21 स्थित मकान का बिल भी गलत भेजा गया।

शहर के लोगों को आम शिकायत है कि एजेंसी ने प्रॉपर सर्वे नहीं किया। पिछले भुगतान को भी नजरंदाज किया और लोगों को ज्यादा रकम के बिल भेजकर बेवजह लाइनों में खड़े होकर परेशान करने का काम किया। इसका खामियाजा निगम को भी भुगतना पड़ा। कई दफा मीडिया रिपोर्ट्स में निगम की किरकिरी हुई। यहां तक कि मेयर उपिंदर आहलुवालिया ने भी मांग उठाई कि निगम ने जिस एजेंसी को ठेका दे रखा, उसका ठेका तुरंत प्रभाव से रद्द करके बकाया भुगतान रोक देना चाहिए क्योंकि सर्वे ही सही नहीं है। ऐसे में अब घर-घर जाकर नई वार्डबंदी का सर्वे कितना गले उतरेगा, समय बताएगा।

नगर निगम पंचकूला में 20 वार्ड हैं। इनमें से 14 वार्ड पंचकूला शहर के दायरे में हैं। अब नई वार्डबंदी में भी 20 वार्ड ही रहेंगे, लेकिन सभी वार्ड पहले की तुुलना में कुछ छोटे हो जाएंगे। नियमानुसार 4 लाख की आबादी तक 20 वार्ड का प्रावधान है। चुनाव जब भी होंगे, 2014 में जारी विधानसभा/लोकसभा चुनाव वोटर लिस्ट के आधार पर ही होंगे।