पीसीएन७ ब्यूरो, पंचकूला। स्मार्ट सिटी…… बने पंचकूला जल्द। ये सपना है विधायक और हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का। सपना अच्छा और पूरा हो सकता है पर…. जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के साथ जुड़े कुछ अफसर जल्द बदले जाएं।
वर्ना तो… जैसा अब तक होता आया है, मीटिंगें होतीं और ज्ञानचंद गुप्ता पूरी शिद्दत के साथ अपने मन की बात साझा करते है। जरुरी दिशा-निर्देश देते लेकिन …ऑन ग्राऊंड रिजल्ट नाम मात्र।
जी हां, ऐसा ही हो रहा है। पंचकूला स्मार्ट सिटी बनेगा कब तक, मौजूदा अफसरों के रहते कोई तारीख तय नहीं हो सकती। रिजल्ट चाहिएं तो कुछ अफसरों के तबादले कराने होंगे और अफसर वहीं लगवाएं जाएं, जो पूरी शिद्दत के साथ पंचकूला के प्रति समर्पणभाव से काम करते हुए दिनों में ऑन ग्राऊंड रिजल्ट दें। ऐसा आकलन है पंचकूला सिटी न्यूज़७ का बीते अर्से में स्मार्ट सिटी कान्सेप्ट को लेकर हुई मीटिंगों और संबंधित अफसरों की कार्यशैली को देखकर।
पाठकों के ध्यान में ला रहे हैं कि बीते १५ जनवरी को ज्ञानचंद गुप्ता ने चंडीगढ़ स्थित विधासभा सचिवालय में पंचकूला के नए चुने गए मेयर कुलभूषण गोयल व सभी 20 पार्षदों की पंचकूला को स्मार्ट सिटी बनाने से जुड़े सभी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ फार्मल इंट्रोडक्शन के लिए मीटिंग बुलाई थी। उस मीटिंग में पंचकूला डेवलपमेंट एडवाइज़री कमेटी के मेंबर्स को भी आमंत्रित किया था।
मीटिंग में ज्ञानचंद गुप्ता ने पंचकूला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 7 सूत्री विज़न देते हुए संबंधित अधिकारियों से ब्लू प्रिंट तैयार करने का कहते हुए ये भी कहा था कि अब अफसरों को अपनी विल्ल दिखानी है, पॉलिटीकल विल्ल तो आपके सामने है क्योंकि सभी पार्षदों और एडवाइज़री कमेटी मेंबर्स ने हर तरह से सहयोग करने का भरोसा दिया था। लबोलुआब ये है कि फौरी तौर पर पंचकूला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पॉलिटीकल विल्ल तो देखने को मिल रही है पर ज्यादातर प्रशासनिक अधिकारियों में आफिशियल विल्ल नहीं। जाहिर है कि सिस्टम में बदलाव किए बिना रिजल्ट नहीं मिलने वाले।

पाठको, आपके अखबार पंचकूला सिटी न्यूज़7 ने इसलिए कुछ अफसरों के तबादले का जिक्र किया है कि ज्ञानचंद गुप्ता ने कई दौर की मीटिंगें बुला लीं लेकिन जो काम बिना प्रशासनिक अप्रूवल यानी अतिरिक्त बजट खर्च किए संभव था, उस पर भी अमल नहीं हो रहा, अगर कुछ हो रहा तो बहुत कम या कागज़ी ही। ऐसे में पंचकूला के बाशिंदे कभी भी ज्ञानचंद गुप्ता के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को मूर्त रूप लिए नहीं देख पाएंगे। जाहिर है कि ऐसा तभी संभव है जब एचएसवीपी, निगम और पुलिस के प्रशासनिक अधिकारी भी धाकड़ सोच वाले ही पोस्टेड होंगे।