Panchkula Special

इस्टेट आॅफिस का दूसरा नाम ‘कमाई’, गर खंगालें फाइलें तो मिलेंगे कई बड़े घपले

 

      सालों से नेक्सस बना है बाबुओं और कुछ प्रॉपर्टी डीलरों में

कपिल चड्ढा, पंचकूला। इस्टेट आॅफिस पंचकूला में हुडा के बाबुओं और दलालों समेत चुनिंदा प्रॉपर्टी डीलरों का ‘नेक्सस’ चल रहा है। कइयों का लिंक तो वर्षों से है। यही जड़ है सरकारी खजाने को चूना लगाने या यूं कहिए फाइलों में घपलों की।

अकाऊंट्स व अलॉटमेंट ब्रांच की फाइलों में कई ‘विकास’ मिलेंगे, हालांकि सीएम फ्लाइंग स्क्वायड तो इन दिनों इस्टेट आॅफिस के एक विकास सैणी की तलाश में है। किसका क्या जुगाड़ है, जानने के लिए अब तक तीनों गिरफ्तार आरोपियोंं को रिमांड पर लिया जाना जरूरी है। पोल खुल जाएगी कि किन प्रॉपर्टी डीलरों का किन बाबुओं के साथ नेक्सस बना हुआ और इस्टेट आॅफिस ‘कमाई’ का जरिया है। आम तौर पर कहा-सुना जाता है कि इस्टेट आफिस में पोस्ंिटग ‘आॅन डिमांड’ मिलती है। एक बार जो बाबू और अफसर यहां लग जाता ‘कमाकर’ ही जाता है। अगर सच जानना है तो इस्टेट आफिस में बीते दो दशक में तैनात रहे हुडा के बाबुओं और अफसरों की प्रापर्टी व बैंक डिटेल्स जांच ली जाएं, सब सामने आ जाएगा। मुख्यमंत्री महोदय, हुडा के इस्टेट आॅफिस में करप्शन बंद करनी है तो फ्लाइंग स्क्वायड को कहें की अकाऊंट्स व अलॉटमेंट ब्रांच की फाइलों को बारीकी से खंगाले। बहुत घपले मिलेंगे। सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ तो मिलेगी ही, सरकारी खजाने को चूना लगाने के कई केस भी हाथ लगेंगे।

इसके लिए जिम्मेदार मिलेंगे तो इस्टेट आॅफिस के अफसर और बाबू, जिनकी मानसिकता नहीं बदली, भले ही बीते तीन दशकों में कई सरकारें बदल गईं। कई मुख्यमंत्री, हुडा प्रशासक व इस्टेट आॅफिसर बदल गए लेकिन हुडा के बाबू नहीं बदले। मुख्यमंत्री महोदय, शहर में आम सुना-कहा जाता है कि हुडा के इस्टेट आॅफिस में हर काम करने के ‘रेट’ तय हैं। बाबुओं के आॅब्जेक्शंस से बचने के लिए बहुत से अलॉटी दलालों को खोज लेते हैं। प्रोफेशनल्स तो अपने ‘रसूख’ से काम करवा ही लेते हैं। सच जानना है तो इस्टेट आॅफिस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देख लें। सुबह से शाम तक कितने दलाल और अन्य प्रोफेशनल्स बेझिझक हुडा के बाबुओं से मिलकर अपनी सहूलियत के अनुसार काम निकलवा जाते हैं। यह भी सच है कि हुडा के इस्टेट आॅफिस में इस्टेट आॅफिसर की मौजूदगी ‘बराएनाम’ रहती, क्योंकि बतौर प्रशासनिक अधिकारी इनका आना-जाना लगा रहता, जबकि हुडा के बाबू पक्के होने के चलते ‘मलाईदार’ सीटों पर वर्षों तक जमे रहते हैं। मुख्यमंत्री महोदय, आप भी जानते हैं कि आज के दौर में पैसा बहुत बड़ी चीज और पैसा इस्टेट आॅफिस के बाबुओं के ज़मीर खरीद लेता है। जब ज़मीर बिक जाए तो बाबू कुछ भी कर सकता है, भले ही नुकसान सरकारी खजाने का हो या फिर किसी जन-साधारण का। सच ये भी है कि बीते तीन दशकों में इस्टेट आॅफिस में कई घपले उजागर हुए और समय बीतने के साथ सब ‘सेटल’ भी हो गए। गौरतलब है कि सीएम फ्लाइंग स्क्वायड ने बीते वीरवार को हुडा पंचकूला के इस्टेट आॅफिस में छापा मार कर हुडा के एक बाबू समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि हुडा का एक बाबू फरार चल रहा है। इससे पहले भी कई बार सरकारी फाइलों से छेड़छाड़ हुई। बाकायदा पुलिस में एफआईआर दर्ज हुर्इं। बाबू गिरफ्तार हो जेल की सलाखों तक भी पहुंचे। जी हां, यह भी सच है कि हुडा पंचकूला के इस्टेट आॅफिस में सालों से बाबुओं की सोच और वर्किंग में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि इन सालों में कई सरकारें बदल गर्इं, कई हुडा प्रशासक व इस्टेट आॅफिसर बदल गए। यहां तक कि रिकॉर्ड की कंप्यूटराइजेशन, सिंगल विंडो सर्विस, आरटीआई, नक्शे पास करने से लेकर आॅक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने के टाइम शेड्यूल में बदलाव समेत सिस्टम में कई तरह के बदलाव हुए, लेकिन बाबुओं की सोच न बदलने के चलते ‘घपलों’ का दौर ज्यों का त्यों बरकरार है।

मुख्यमंत्री महोदय, जानकारी के अनुसार हुडा की अलॉटमेंट ब्रांच के कई बाबुओं का शहर के चुनिंदा प्रॉपर्टी डीलरों के साथ ‘याराना’ है। डीलरों की मांग पर फाइलों की सारी जानकारियां खुलेआम शेयर कर दी जाती हैं। शहर में यहां तक भी सुना जाता है कि हुडा के इस्टेट आॅफिस में हर काम करने के ‘रेट’ तय हैं। बाबुओं के आॅब्जेक्शंस से बचने के लिए बहुत से अलॉटी दलालों को खोज लेते हैं। प्रोफेशनल्स तो अपने ‘रसूख’ से काम करवा ही लेते हैं।