Panchkula Special

फाइलों में रह गए नए फायर स्टेशन  

     25 साल से एक ही फायर स्टेशन है पंचकूला में, अमला भी सीमित
कपिल चड्ढा, पंचकूला। कहने को पंचकूला हरियाणा के मानचित्र पर टॉप का शहर। अघोषित राजधानी। 200 से ज्यादा बहुमंजिला इमारतें। असंख्य कमर्शियल व रेजिडेंशियल भवन। शहर की आबादी 3 लाख से ज्यादा, मगर आगजनी से बचाव के मामले में फायर स्टेशन एकमात्र और यह सेक्टर 5 में बना है। इसे हुडा ने 1992-93 में बनाया था।
कई साल पहले पंचकूला में नए फायर स्टेशन बनाने की फाइल चली थी। हरियाणा चैंबर आॅफ कॉमर्स व इंडस्ट्रीज़ समेत अन्य औद्योगिक संगठनों ने इंडस्ट्रियल एरिया में अलग से फायर स्टेशन मांगा था। उद्यमी तो फायर टेंडर की कॉस्ट तक झेलने को तैयार थे। तो भी तब के अफसरों ने बात सिरे नहीं चढ़ाई। ऐसे ही मनसा देवी कॉम्प्लेक्स, पंचकूला एक्सटेशन (घग्गर पार) में तीन नए फायर स्टेशन बनाए जाने की फाइल चली थी।  तीनों जगह हुडा ने जगह भी निश्चित कर रखी है। तब उम्मीद की गई थी कि समय के साथ नए फायर स्टेशन बन जाएंगे, क्योंकि ये बहुत जरूरी और डेवलपमेंट का हिस्सा हैं।
लेकिन… समय बीत गया और नए फायर स्टेशनों की प्रपोजल भी सरकारी फाइलों में उलझ कर रह गई। शहर में 2001 में नगर परिषद बनी जो 2013 में नगर निगम में बदल गई। तब से लेकर अब तक एक भी फायर स्टेशन नया बनाने का प्रस्ताव सामने नहीं आया।
बहुमंजिला इमारतों में आग व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए बहुत जरूरी ‘हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म’ देने के नाम पर भी ‘मजाक’ हो रहा है। पिछली सरकार में स्थानीय विधायक के स्तर पर विधानसभा में मुद्दा उठाया गया, पास भी हो गया, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ। अब मौजूदा सरकार में भी मसले पर कोई ज्यादा हलचल नहीं हो रही।
यानी, पंचकूलावासी जान-माल की सुरक्षा के मामले में वर्षों से ‘ठगे’ महसूस कर रहे हैं। ठगा हुआ इसलिए कि हुडा ने शहर को डेवलप करने का जिम्मा 1977 में संभाला और 15 साल बाद सेक्टर 5 में फायर स्टेशन बनाकर दिया। साथ ही दो फायर टेंडर भी दिए। तब की आबादी और जरूरतों के लिहाज से दो फायर टेंडर के साथ एक फायर स्टेशन काफी था। अब समय बीतने के साथ आबादी बढ़कर 3 लाख से ज्यादा हो चुकी, लेकिन फायर स्टेशन अब भी एक है। जाहिर है कि बीते 25 सालों में कोई नया फायर स्टेशन बनाना स्थानीय प्रशासन ने जरूरी नहीं समझा। यह ठीक है कि इन दिनों पंचकूला में फायर टेंडर 9 हैं। एक वाटर बाउजर (पानी के स्टोरेज टैंक समेत वाहन) भी है लेकिन यह नाकाफी है। वजह साफ है कि फायर स्टेशन पर अमला सीमित और संसाधन भी बहुत कम हैं।
सीढ़ी, जोकि जान-माल की सुरक्षा के लिए एकमात्र साधन है, राहत कर्मचारियों के पीड़ित लोगों तक पहुंचने का, उसकी ऊंचाई महज 35 फीट है, जबकि पंचकूला में 100 फीट से ज्यादा ऊंची इमारतें भी बन गई हैं। आप सहज अंदाज लगाइए कि जरूरत पड़ने पर 35 फीट की सीढ़ी 100 फीट से ऊंची इमारत में कितना काम आएगी।  जब तक समाधान खोजा जाएगा, तब तक जान-माल का नुक्सान ज्यादा हो जाएगा। पंचकूला में बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने से लेकर प्राकृतिक आपदा में राहत देने के लिए सरकार हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म देने को तो राजी हुई, लेकिन यह पुराना मिलना तय है। चर्चा यही है कि फरीदाबाद को सरका से नया मिलने वाला और वहां मौजूद करीब 10/12 साल पुराना हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म पंचकूला आएगा।
लब्बोलुआब ये है कि आगजनी व प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए बेहद जरूरी नए फायर स्टेशनों की स्थापना को लेकर पंचकूला के साथ ज्यादती हो रही है। नए फायर स्टेशन कब बनेंगे, कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है।
कहने को पंचकूला में बहुत हो रही डेवेलपमेंट
पंचकूला में 9 फायर टेंडर और तंग गलियों में जाने के लिए जीपनुमा फायर टेंडर समेत एक वाटर बाउजर है। करीब 20 किलोमीटर दूर बरवाला के इंडस्ट्रियल एरिया में दो फायर टेंडर और एक वाटर बाउजर उपलब्ध है। इसी तरह कालका में दो फायर टेंडर हैं। सारे फायर स्टेशनों पर कुल मिलाकर 52 कर्मचारी मौजूद हैं। काफी संख्या कॉन्ट्रैक्ट आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों की है। सीढ़ी की अधिकतम ऊंचाई महज 35 फीट है। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म गुरुग्राम और फरीदाबाद में ही उपलब्ध हैं।