सैलेरी स्ट्रक्चर में 1 अप्रैल से होने वाले बदलाव के फैसले को केंद्र सरकार ने फिलहाल टाल दिया है। इसकी वजह कुछ राज्यों की लेबर कोड्स को लेकर तैयारी अधूरी होना बताया गया है। कानूनों में बदलाव के चलते आपकी टेक होम यानी इन हैंड सैलरी कम होती, लेकिन प्रॉविडेंट फंड यानी पीएफ की रकम बढ़ जाती। इसका सीधा अर्थ है यह था कि सरकार आपकी सेविंग को बेहतर बनाने की कोशिश में है।

केंद्र ने पिछले दिनों 29 श्रम कानूनों में बदलाव कर 4 लेबर कानून बना दिए थे। जिसके बाद कंपनियों को अपने कर्मचारियों की सैलेरी स्ट्रक्चर समेत कई अहम बदलाव करने के लिए कहा गया था। नौकरीपेशा लोगों के लिए देश में 29 श्रम कानून थे, जिसमें पिछले साल सरकार ने बदलाव करते हुए 4 कर दिए हैं। ये कानून हैं- व्यावसायिक सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य और कार्य की स्थितियां, औद्योगिक संबंध और सामाजिक सुरक्षा कानून।

नए कानून का असर एंप्लॉई की सैलरी पर पड़ेगा लेकिन सेविंग के चलते भविष्य के लिए ज्यादा बचत होगा। PF पर मिलने वाला हर साल ब्याज 8-8.5% के बीच मिलता है। कुल मिलाकर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह एक सकारात्मक कदम है।