Panchkula Special

निगम का इंजीनियरिंग विंग फेल

बारिश में सड़कों और पार्किंग्स का ये होता है हाल

कपिल चड्ढा.पंचकूला। वहीं हो रहा जिसका डर था। नगर निगम ने पंचकूला में सड़कों के साथ-साथ बरसाती पानी की निकासी की जिम्मेदारी भी हुडा से ओट ली, लेकिन जिम्मेदारी निभा नहीं पा रहा। देखिए तस्वीरें। ये होता है हाल शहर में बारिश के दौरान सड़कों पर पार्किंग्स का। तीनों तस्वीरें सोमवार की दोपहर शहर में हुई हल्की बारिश की हैं। जाहिर है कि बारिश मूसलाधार और कुछ घंटे लगातार चलती तो शायद शहर में बाढ़ जैसे हालात बन जाते।

देखिए, पहली तस्वीर सेक्टर 8 की मार्केट में गोपाल स्वीट्स के सामने बनी सड़क की है। यह वही सड़क है जो सेक्टर 5/8 की डिवाइडिंग रोड और सेक्टर 8 की मार्केट से जुड़ी बी-रोड है। इस सड़क पर हल्की सी बारिश के बाद पानी का जमावड़ा इस कदर नगन निगम के इंजीनियरिंग विंग की पोल खोल रहा है।

दूसरी तस्वीर सेक्टर 6 मार्केट में सिटी मेडिकोज के सामने बनी पार्किंग की है। देखिए किस कदर पानी का जमावड़ा बना हुआ और इतने पानी में कार/स्कूटर से उतरना या कार/स्कूटर पर बैठना कितना मुश्किल होगा, आप सहज अंदाज लगा सकते हैं। जाहिर है कि निगम का इंजीनियरिंग विंग शहर में बरसाती पानी की निकासी की मैनेजमेंट को संभालना तो दूर, अभी समझ भी नहीं पाया है।

तीसरी तस्वीर सेक्टर 6 में जिमखाना क्लब और टोपायरी पार्क से जुड़ी सड़क की है। ये सड़क जिस कदर बारिश में पानी से लबालब है, आप दोपहिया वाहन पर तो अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सकते, क्योंकि बारिश का पानी इंजन में घुसने का डर रहेगा।

इन तीनों तस्वीरों से साफ जाहिर हो रहा कि निगम को बारिशों का मौसम शुरू होने से पहले शहर में रोड गलीज़ व मेन होल्स की जो सफाई करवा लेनी चाहिए थी, नहीं LC01 LC03करवाई। या फिर अधूरी करवाई है। इससे पहले यही जिम्मेदारी हुडा के पास करीब चार दशक तक रही और कई मौके पर हुडा की भी किरकिरी होती रही है, हालांकि रोड गलीज़ की सफाई  के मामले में हुडा काफी पहले तैयारी कर लेता रहा है। बावजूद इसके बारिश ‘पोल’ खोल देती रही है।  गौरतलब है कि नगर निगम ने पिछले दिनों 1.14 करोड़ रुपए की लागत से शहर में रोड गलीज़ की सफाई कराने का टेंडर लगाया, लेकिन अब तक सारे टेंडर्स पर काम भी शुरू नहीं हो पाया है, जबकि बारिशों का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में निगम की लापरवाही का खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ेगा ही, क्योंकि जो काम अप्रैल में पूरा हो जाना चाहिए था और इसे अंजाम देने की अब कोशिश की जा रही है। यह जानना जरूरी है कि निगम के पास सुपरवाइजरी स्टाफ तो कम है ही, निचले दर्जे का स्टाफ भी बहुत कम है। सिविल विंग में कुछ अफसर ऐसे भी लगाए गए,  जो सिविल काडर के हैं ही नहीं। हाल ही में हुडा से डेपुटेशन पर कुछ स्टाफ लिया गया, जिनमें कुछ जूनियर इंजीनियर मैकेनिकल काडर के हैं। जाहिर है कि जिन अधिकारियों ने कभी सिविल विंग का काम गहराई से स्टडी ही नहीं किया, वे मौके पर वो परफॉर्मेंस नहीं दे सकते, जिसकी कल्पना निगम के प्रशासनिक अधिकारी और शहर की जनता कर रही है।