Panchkula Special

14/7 को हाईकोर्ट पहुंचेगी मेयर व कमिश्नर की जंग

मेयर बोलीं, कमिश्नर के दोनों लेटर भी पेश करेंगे अदालत में

कपिल चड्ढा, पंचकूला। नगर निगम पंचकूला में मेयर उपिंदर आहलुवालिया और कमिश्नर डॉ. शालीन के बीच चल रही ‘जंग’ अब 14 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचेगी। इसी दिन जस्टिस अमित रावल की अदालत में ‘प्रदीप सिंह बनाम हरियाणा सरकार’ केस की सुनवाई और इसी में निगम के कामकाज की समीक्षा भी होनी है।

गौरतलब है कि जस्टिस अमित रावल की अदालत पहले ही निगम की कार्यशैली से खफा और पिछली पेशी में निगम कमिश्नर डॉ. शालीन के हल्के-फुल्के जवाब से खफा होकर 5 लाख रुपए का जुर्माना ठोंक चुकी है। इस बीच मेयर आॅफिस ने 21 जून की हाउस मीटिंग के मिनट्स और पारित प्रस्तावों का ब्यौरा डिवीजनल कमिश्नर, डायरेक्टर अर्बन लोकल बॉडीज़ समेत सरकार को क्रियान्वयन के लिए भेज दिया है। इनमें पंचकूला के सेक्टर 23 में चल रहे टेंपरेरी डंपिंग ग्राउंड और झूरीवाला गांव में बनने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की शहर से बाहर शिफ्टिंग, शहर में पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए घग्गर नदी पर सब-सरफेस डैम बनाने, सड़कें बनाने, सेनिटेशन व्यवस्था सुधारने समेत अन्य प्रस्ताव शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार मेयर उपिंदर आहलुवालिया जिस मूड में इन दिनों कागज़ी सुबूत जुटा रहीं, 14 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सारे सुबूत पेश कर बताएंगी कि निगम में सरकार के कथित हस्तक्षेप के चलते कामकाज नहीं हो रहा। किन हालात में 19 व 21 जून की हाउस मीटिंग में निगम कमिश्नर डॉ. शालीन न खुद पहुंचे और न ही अधीनस्थ पंकज सेतिया (ज्वाइंट कमिश्नर) को ही मीटिंग में भेजा। उल्टा कमिश्नर ने मेयर के खिलाफ राज्य के चीफ सेक्रेटरी को  शिकायत पत्र भेजकर धमकाने का आरोप लगाया। अगले दिन नया पत्र लिखकर उसमें चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया का विशेष तौर पर जिक्र  किया, क्योंकि चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया  मेयर के करीबी रिश्तेदार हैं।

मेयर उपिंदर आहलुवालिया ने ‘पंचकूला सिटी न्यूज7’  के साथ बातचीत में कहा कि वे बतौर मेयर व पार्षद जनता के समक्ष रात-दिन जवाबदेह हैं। पूरी ईमानदारी के साथ हरियाणा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत मिले अधिकारों/शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए काम कर रही हैं। इसी तरह पब्लिक सर्वेंट (आईएएस अधिकारी) निगम कमिश्नर डॉ. शालीन भी जवाबदेह, लेकिन सोची-समझी राजनीति का शिकार होकर काम कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के समक्ष 14 जुलाई को तथ्यों के साथ बताया जाएगा कि निगम कमिश्नर डॉ. शालीन आईएएस ने 19 जून को कॉल की गई निगम हाउस की मीटिंग से ऐन पहले ज्वाइंट कमिश्नर की मार्फत कहलवाया कि वे मीटिंग में नहीं आ सकते व मीटिंग कैंसल की जाए। मीटिंग कैंसल अथवा स्थगित करने का अधिकार मेयर को ही है। कमिश्नर के कहने से मीटिंग कैंसल नहीं हो सकती। लिहाजा नियमानुसार एक्ट में प्रावधान के तहत 19 जून की मीटिंग स्थगित कर अगली मीटिंग 21 जून को बुला ली गई। कमिश्नर डॉ. शालीन 21 जून को शहर में होते हुए भी मीटिंग में नहीं आए। इससे यही साबित हुआ कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान और जनहित में काम करने में विश्वास नहीं रखते। इतना ही नहीं, कमिश्नर ने पहले दिन राज्य सरकार को लिखे शिकायत पत्र में बात को बढ़ा-चढ़ाकर और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर लिखा फिर अगले दिन उसी शिकायत पत्र की भाषा को और ‘प्रभावी’ बनाते हुए चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया का भी विशेष तौर पर जिक्र किया। ये दोनों पत्र अदालत के समक्ष पेश किए जाएंगे, जिनकी भाषा साफ संकेत देती है कि दोनों ही पत्र डॉ. शालीन ने अपनी समझ से न लिखते हुए किसी के ‘इशारे’ पर लिखे हैं।

मेयर का कहना है कि अगर उनके खिलाफ धमकाने की बात सच है तो कमिश्नर, डॉ. शालीन को अपने मोबाइल की कॉल रिकार्डिंग निकलवा सरकार के समक्ष यह साबित भी करना चाहिए कि जो दोनों शिकायत पत्रों में कहा गया, वह प्रमाणित है।

सोशल मीडिया का भी देंगे हवाला

मेयर ने कहा कि कमिश्नर डॉ. शालीन ने उनके खिलाफ राज्य सरकार को जो दोनों शिकायत पत्र लिखे, सरकार तक पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जाहिर है कि इसमें भी कोई सोची-समझी चाल रही है। कमिश्नर समेत कुछ अन्य लोग चाहते थे कि जो बात सरकार तक पहुंचनी, उसे सोशल मीडिया के जरिए पहले ही हजारों लोगों तक पहुंचा दिया जाए ताकि मेयर की बदनामी खुलेआम हो सके।