बीमा कंपनियां मानसिक और आनुवांशिक बीमारियों को भी कवर करें, IRDA का प्रस्ताव

बीमा नियामक IRDA ने मानसिक समस्याओं, आनुवांशिक बीमारियों, मस्तिष्क और मनोवैज्ञानिक विकारों को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से बाहर नहीं रखने का प्रस्ताव दिया है। IRDA का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को इस मामले में एकरूपता रखनी चाहिए। स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और इससे जुड़े उत्पादों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए अथॉरिटी ने यह प्रस्ताव दिया है।
IRDA का कहना है कि प्रस्तावित गाइडलाइंस का मकसद हेल्थ इंश्योरेंस के एक्सक्लूजंस (दायरे से बाहर) को तर्कसंगत और मानकीकृत बनाना है। इरडा ने इसके लिए वर्किंग ग्रुप बनाया था। ग्रुप की सिफारिशें जांचने के बाद गाइडलाइंस जारी करने का प्रस्ताव दिया है।

इन पक्षों पर 31 मई तक टिप्पणी मांगी
– IRDA का कहना है उत्तेजक या डिप्रेशन की दवाएं जो कि डॉक्टर ने लिखी हों उन्हें भी बीमा कवर के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता।
– यौवन और मेनोपॉज संबंधी विकार, आयु और व्यवहारिक संबंधी विकारों को भी पॉलिसी से बाहर नहीं रखा जा सकता।
IRDA ने इस संबंध में ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर संबंधित पक्षों से 31 मई तक टिप्पणी मांगी है।

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