एचएसवीपी नियमों में ‘पीजी’ शब्द ही नहीं, पुष्टि की है एसडीओ सर्वे एमपी शर्मा ने
कपिल चड्ढा/ पंचकूला। जी हां, पंचकूला में जहां कहीं और जितने घरों में भी ‘पीजी’ चल रहे, सभी अवैध हैं। वजह साफ है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नियमानुसार रिहायशी प्लॉटों पर बनने वाले मकानों में ‘पीजी’ चलाने का कोई प्रोविजन ही नहीं है। यानी, जिन घरों में भी पीजी चल रहे, संबंधित मालिक रिहायशी प्लॉटों का कमर्शियल यूज़ कर रहे, जोकि नियमानुसार गलत है।
इस बात की पुष्टि इस्टेट ऑफिस की सर्वे ब्रांच के एसडीओ एमपी शर्मा ने पंचकूला सिटी न्यूज7 के संपर्क करने पर की। इस बीच बुधवार से सर्वे ब्रंाच के सभी जेईज़ को सर्वे कर रिपोर्ट देने को कह दिया गया है कि उनके एरिया में कहां-कहां पीजी चल रहे, पता लगाकर रिपोर्ट सब्मिट करें। यहां गौर करने लायक बात यह है कि जिस तरह से सर्वे करने को कहा गया शायद महीनों तक भी सही रिपोर्ट नहीं मिलने वाली। वजह ये है कि सर्वे ब्रांच में स्टाफ ही बहुत कम और काम ज्यादा है।
यहां ये भी क्लीयर किया जा रहा कि शहर के विभिन्न सेक्टरों में हाउसिंग बोर्ड के मकान बने और उन पर भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नियम ही लागू हो चुके हैं, भले ही अभी न तो लोगों को सही जानकारी और न ही सरकारी मशीनरी की तरफ से ही प्रभावी रूप दिया गया है।
यह पीजी का मसला इसलिए उठाया गया, क्योंकि पिछले हफ्ते चंडीगढ़ के सेक्टर 32 में एक घर में चल रहे ‘पीजी’ में आग लगने से तीन युवतियों की मौत हो गई और एक जख्मी हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद चंडीगढ़ के डीसी मनदीप सिंह बराड़ के निर्देश पर प्रशासन ने सर्वे कर अवैध रूप से पीजी चलाने वालों पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। पर…पंचकूला में अवैध पीजी पर कार्रवाई के नाम पर अभी कोई हलचल शुरू नहीं हुई।
जाहिर है कि पंचकूला को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने डेवलप किया था। बीच में कहीं-कहीं हाउसिंग बोर्ड के मकान भी बने और शुरू में उनके अलग नियम-कायदे थे। बाद में उच्चस्तरीय फैसले के तहत हाउसिंग बोर्ड के मकानों पर भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नियम-कायदे लागू कर दिए गए।
ऐसे में समय की मांग है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण हरेक सेक्टर में डोर-टू-डोर सर्वे कर रिहायशी प्लॉटों का मिसयूज़ करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करे। साथ ही वही लिस्ट पुलिस को भी मुहैया करे, ताकि पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पीजी वाले घरों पर निगरानी रख सके।

घरों में पीजी चलने का सबसे बड़ा असर पड़ रहा है पानी, सीवरेज, बिजली और पार्किंग के मसले पर। जाहिर है कि जिस घर में अधिकतम 8-10 लोग ही रहते, वहां ‘पीजी’ के चलते ऑक्यूपेंसी काफी ज्यादा है। इसका असर उपरोक्त सभी मसलों के मद्देनजर आंका जा सकता है। समय की मांग है कि सरकार/हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण कोई पॉलिसी बनाकर पीजी सिस्टम को रेगुलेट करे। इससे पीजी में रहने वाले लोगों की जरूरतें भी पूरी होंगी और सेफ्टी मेजर्स समेत अन्य मसलों पर भी समय रहते उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
-बीबी सिंगल, पूर्व उपाध्यक्ष, नगर परिषद पंचकूला

शहर में लगभग हर मोहल्ले में पीजी चल रहे और इसकी जानकारी न तो शायद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास और न ही पुलिस अथॉरिटी के पास ही है। यानी, पीजी के तौर पर कौन लोग रह रहे, कब से रह रहे, क्या करते और इनके पास कौन लोग आते-जाते, कुछ भी दस्तावेजी नहीं है। यह बहुत चिंता का विषय है, क्योंकि यह पीजी सिस्टम शहर की सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ, हालांकि जरूरतमंदों के लिए यह फायदेमंद भी है। लेकिन…कहीं न कहीं चेक जरूरी है।
-आरपी मल्होत्रा, अध्यक्ष, फोरम ऑफ रेजिडेंट एसोसिएशंस, पंचकूला