Chandigarh

घग्गर पार के सेक्टर 24 से 28 के लिए गुड न्यूज. अलॉटियों को एन्हासमेंट में मिलेगी कुछ राहत अब

लोकेश चड्ढा
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, यहां घग्गर पार के सेक्टर 24 से 28 के अलॉटियों को बड़ी राहत देने जा रहा है। मसला एन्हासमेंट से जुड़ा है। सरकार ने एन्हांसमेंट के मसले पर जनसाधारण के रोष को तकनीकी तौर पर अध्ययन करने के बाद कुछ रियायत देने का फैसला किया है। इसके एवज में जो भी पैसा अब तक अलाटियों से वसूलने की बात चलती रही, वह रकम ‘मंगल नगर विकास योजना’ के तहत कवर की जाएगी या फिर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अपने संसाधनों से वहन करेगा।
जानकारी के अनुसार हाल ही में संपन्न हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अथारिटी की मुख्यमंत्री मनोहर लाल, जो कि अथारिटी के चेयरमैन भी हैं, की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में पंचकूला के घग्गर पार निवासियों से वसूले जाने वाली एन्हासमेंट को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है।
इसके तहत सड़कों, पार्कों समेत अन्य सार्वजनिक इस्तेमाल के प्रोजेक्ट्स में कवर जमीन का नए सिरे से आंकलन किया जाएगा। लिहाजा उसी के अनुसार एन्हासमेंट की रकम का बकाया बनाया जाएगा। यह सब सुप्रीमकोर्ट के 9 अक्तूबर 2017 के फैसले पर अमल के रूप में सामने आएगा। इसमें कहा गया कि घग्गर पार के सेक्टरों के लिए 1154 एकड़ कुल जमीन एक्वायर की गई थी। जिसमें से 272 एकड़ जमीन घग्गर नदी और ओपन स्पेस आदि में कवर हो रही है। अलाटियों का रोष ये है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण उनसे फालतू पैसा एन्हासमेंट के तौर पर लेता आया और आगे भी मांग रहा है। इसी को लेकर अलाटी पहले पंजाब व हरियाणा हाईकोट व बाद में सुप्रीमकोर्ट तक।
जानकारी के अनुसार आमतौर पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण किसी सेक्टर में सेलएबल एरिया 50 से 55 प्रतिशत रखता है। लेकिन…सेक्टर 24 से 28 में लगभग 38 प्रतिशत ही है। किसी सेक्टर में 15.85 और कहीं 47.30 प्रतिशत है।
काफी सोच-विचार के बाद प्राधिकरण के आला अधिकारियों ने घग्गर पार के अलाटियों को कुछ राहत देने का सोचते हुए फाइल को नीतिगत फैसले के तहत लाने के लिए अथारिटी के समक्ष पेश किया था जिसे अप्रूवल दे दी गई है। अब देखने वाली बात ये है कि कब नए सिरे से घग्गर पार के अलाटियों के लिए एन्हासमेंट के तहत कवर की जाने वाली जमीन के एवज में एन्हासमेंट की सही रकम निकाली जाती है। फिर उसका अब तक का लेनदेन देखा जाएगा और अगर कुछ बकाया अलाटियों से लेना बनता होगा तो लिया जाएगा वरना प्राधिकरण को कइयों को रिफंड भी देना पड़ सकता है।