सिविल अस्पताल मेें चल रहा ‘प्रोपेगेंडा’ का खेल, दवाई अंदर से, टॉनिक बाहर से

cccपंचकूला। हेल्थ डिपार्टमेंट की नाक तले सिविल अस्पताल पंचकूला के कुछ डॉक्टर खुलेआम ‘कमाई’ का खेल खेल रहे हैं। ये डॉक्टर ओपीडी स्लिप पर प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाइयों के साथ एक छोटी पर्ची अलग से लिखते हैं, जिस पर टॉनिक/विटामिन्स रिकमेंड किए जाते और वह डॉक्टरों के चहेते केमिस्टों के पास मिलते हैं। यानी, मरीज बीमारी के इलाज के लिए दवाई अस्पताल से लेता और ‘ताकत’ के लिए टॉनिक बाहर बाजार से।

बता दें कि ऐसा ही खेल चार साल पहले इसी अस्पताल में खूब चला और जब बात तत्कालीन हेल्थ की फाइनेंशियल कमिश्नर अनुराधा गुप्ता तक पहुंची तो उन्होंने ऐसा शिकंजा कसा कि डॉक्टरों के लिए कई तरह की हिदायतें तो जारी की हीं, पकड़ में आए कई डॉक्टरों का तबादला  कर दिया था। तब तहलका मच गया और ‘प्रोपेगेंडा आइटम्स’ की बिक्री बंद हो गई थी।

अब वही प्रोपेगेंडा आइट्म्स का खेल फिर से शुरू हो गया है, जिस पर नकेल न कसी गई तो स्वा•ााविक है कि आने वाले दिनों में बढ़ जाएगा। जानकारी के अनुसार अस्पताल के कुछ डॉक्टर कुछ कंपनियों के चुनिंदा ब्रांड की प्रोमोशन में पिछले कई महीनों से लगे  हुए हैं।

देखिए ये पर्चियां…  ये लोग वि•ाागीय कार्रवाई से बचने के लिए दवाइयां तो अस्पताल के ओपीडी कार्ड पर प्रिस्क्राइब करते और अपनी पसंद का टॉनिक/विटामिन अलग से पर्ची लिखकर देते हैं। मरीज को बीमारी से निजात चाहिए होती, सो वह डॉक्टर की बात को मान लेता है। जो टॉनिक प्रोपेगेंडा आइटम के तहत रिकमेंड किए जा रहे, काफी महंगे होते हैं। खास बात यह है कि सिविल अस्पताल के चुनिंदा डाक्टरों के रिकमेंड किए टॉनिक/विटामिन शहर में हर दुकान पर नहीं मिलते, बल्कि चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। जिन कंपनियों के ये प्रोडक्ट होते, उनके एमआर अस्पताल के आसपास बैठे दुकानदारों को टॉनिक बेचने को कहते और अगर कोई दुकानदार आनाकानी करता, तो इन्हें रिकमेंड करने वाले डॉक्टरों का हवाला दिया जाता और अगर दुकानदार तब न माने तो चुनिंदा दुकानों पर ही बेचने के लिए रखवा दिया जाता, जिन पर चुनिंदा डॉक्टरों की खास मेहरबानी रहती है।

कुल मिलाकर सस्ते में इलाज के नाम पर पंचकूला में सरकारी डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों के परिवार सरेआम लुटने शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि हाल ही में पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने हेल्थ मिनिस्टर अनिल विज को लिखित रूप में सिविल अस्पताल पंचकूला के  में जांच बिठाने की सिफारिश की है। यह मसला नेत्र रोग वि•ााग का है। इस वि•ााग की एक मशीन अर्से से खराब पड़ी और विधायक ने इसी मशीन के जल्दी खराब होने पर सवाल उठाया है।

मजे की बात यह है कि अस्पताल की कार्यशैली पर अंगुली किसी व्यक्ति या संस्था ने नहीं उठाई वर्ना आरोप लगता कि अमुक व्यक्ति या संस्था द्वेष से प्रेरित है। अब खुद विधायक ‘पार्टी’ बने हैं, सो अंदाज लगाया जा सकता है कि मामला ज्यादा गं•ाीर है। अब सवाल यह उठता है कि इसी अस्पताल में चुनिंदा डॉक्टरों द्वारा अपनी जेब  या चहेती कंपनियों का धंधा बढ़ाने के लिए खेला जा रहा प्रोपेगेंडा आइटम्स का खेल रोकने के लिए विधायक व हरियाणा सरकार कितनी गं•ाीरता दिखाते हैं।

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