काश! हाईकोर्ट आदेश दे पंचकूला के लिए भी

एन्क्रोचमेंट बढ़ रही है रेहड़ी-फड़ी वालों की 

लोकेश चड्ढा, पंचकूला। चंडीगढ़ में स्ट्रीट वेंडर्स की बढ़ती तादाद को देख पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम पर तल्ख टिप्पणी देते हुए एक महीने के भीतर अवैध वेंडर्स को हटाने के आदेश दिए हैं। काश! हाईकोर्ट, पंचकूला में एन्क्रोचमेंट का भी संज्ञान ले। यहां अधिकारी अपने स्तर पर तो कुछ करते नहीं, संभव है कि हाईकोर्ट का ‘डंडाÓ चलता देख कुछ ठोस कर दिखाएं, वर्ना शहर का सूरत-ए-हाल तो आए दिन बिगड़ता ही जा रहा है।
हकीकत ये है कि शहर में एन्क्रोचमेंट, यानी रेहड़ी-फडिय़ों के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम दोनों ही जिम्मेदार हैं। यूं जिम्मेदारी तो लोकल ट्रैफिक पुलिस की भी, क्योंकि सड़कों पर या रोड बम्र्स पर लगने वाली रेहड़ी-फडिय़ों की वजह से आवाजाही भी प्रभावित होती है। उल्लेखनीय है कि ट्रैफिक पुलिस सड़क पर खड़े वाहनों को ‘रॉन्ग पार्किंगÓ के नाम पर उठा ले जाती लेकिन सड़क किनारे खड़े रेहड़ी-फड़ी वालों को खदेडऩे के मामले में मुंह फेर लेती है। जबकि…कायदे से पुलिस की भी जिम्मेदारी बनती है कि रेहड़ी-फडिय़ों को सड़क या सड़क किनारे पनपने ही न दे लेकिन…जिम्मेदारी से बचा जा रहा है।
गौरतलब है कि पंचकूला में एन्फोर्समेेंट स्टाफ बराए-नाम है। लिहाजा एन्क्रोचमेंट पर काबू भी बराए-नाम है। अव्वल तो एन्क्रोचमेंट हटाने को लेकर न तो कोई रेगुलर ड्राइव चलाई जाती और न ही रेगुलर स्टाफ ही है। दाएं-बाएं से कामचलाऊ बंदों के दम पर एन्फोर्समेंट स्टाफ को एन्क्रोचमेंट हटाने के लिए कभी-कभार भेज दिया जाता, जो कभी तो बैरंग लौट आता या कभी थोड़ा-बहुत रेहड़ी-फडिय़ों को अगर खदेड़ा जाता, तो चंद मिनटों के बाद फिर से वही ‘मंजरÓ देखने को मिलता है। यानी, एन्फोर्समेंट स्टाफ की एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव को सरेआम ठेंगा दिखाया जाता है।
अब बात करते हैं नगर निगम की लंबित वेंडिंग पॉलिसी की। यह पॉलिसी लागू होनी है। कब होनी है, कैसे होनी है, किन लोगों पर लागू होनी, अभी तक कोई ‘ब्लू प्रिंटÓ सामने नहीं है। रिजल्ट ये है कि जब से रेहड़ी-फड़ी वालों के दिलो-दिमाग में आया कि नगर निगम ने लाइसेंस देकर रेहड़ी-फड़ी वालों को वेंडिंग पॉलिसी के तहत पक्की जगह देकर या काम करने के लिए जगह निश्चित करके एडजस्ट करना है, रेहड़ी-फड़ी वालों की तादाद आए दिन बढ़ती जा रही है।
यूं तो निगम अपने स्तर पर करीब 3900 वेंडर्स होने का दावा करता है, जोकि एक निजी कंपनी के माध्यम से सर्वे के जरिए निगम को बताए गए हैं लेकिन हकीकतन कितने रेहड़ी-फड़ी वाले शहर में काबिज हैं, कोई पुख्ता जानकारी किसी के पास नहीं है। जाहिर है कि जब तक निगम वेंडिंग पॉलिसी के तहत पात्र रेहड़ी-फड़ी वालों को एडजस्ट नहीं करता, एन्क्रोचमेंट का दायरा बढ़ता ही जाएगा।
हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि एन्क्रोचमेंट के मामले में पूरी ईमानदारी से काम करने की जरूरत है। यह सभी को समझ आना चाहिए, क्योंकि शहर उनका भी है। अवैध रेहड़ी-फड़ी वाले हटते हैं तो शहर के लिए बेहतर होगा। शहर की सुंदरता और सेक्टरों की हालत रेहड़ी-फड़ी वालों ने खराब कर रखी है।

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