Panchkula

हाईकोर्ट से सरकार को झटका, निगम गठन को लेकर कमिश्नर अंबाला की रिपोर्ट पर नोटिस

लोकेश चड्ढा, पंचकूला। नगर निगम पंचकूला के गठन और कालका-पिंजौर को अलग करने संबंधी डिवीजनल कमिश्नर अंबाला की सरकार को सौंपी रिपोर्ट पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को सरकार के नाम नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि क्यों न उपरोक्त रिपोर्ट पर स्टे दे दिया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 29 जनवरी के लिए तय की गई है।
यह केस जस्टिस दया चौधरी की अदालत में लगा है। याचिका नगर निगम में वार्ड नंबर 4 से पार्षद सतिंदर सिंह टोनी ने दायर की है। इसी के साथ ही पंचकूला नगर निगम के नए स्वरूप के गठन को लेकर सरकार के स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को जबर्दस्त झटका लगा है। देखते हैं कि 29 जनवरी को सरकार क्या जवाब देती या फिर जवाब देने के लिए अदालत से और समय मांगती है। जब भी अदालत को जवाब मिलता, अदालत कितना सहमत होती है। कुल मिलाकर पंचकूला नगर निगम के नए स्वरूप को लेकर सरकार के स्तर पर किए जा रहे प्रयास फिलहाल थम जाएंगे क्योंकि सरकार भी नहीं जानती कि आगे हाईकोर्ट का रुख क्या रहेगा।
इससे पहले पंचकूला की मेयर उपिंदर आहलुवालिया ने भी हाल ही में सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने भी पिंजौर-कालका को अलग करने पर एतराज उठाया है। इसी संदर्भ में नगर निगम से भी बीते 14 दिसंबर की हाउस मीटिंग में प्रस्ताव पारित हो चुका है। अब हाईकोर्ट में दायर याचिका में कालका-पिंजौर को नगर निगम के दायरे से बाहर करने को लेकर डिवीजनल कमिश्नर अंबाला की सरकार को सौंपी रिपोर्ट को चुनौती दी है। बकौल टोनी, पिंजौर व कालका को अलग करके नगर निगम पंचकूला का गठन नहीं किया जा सकता, क्योंकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पंचकूला की आबादी 3 लाख से कम है, जबकि निगम गठन के लिए 3 लाख का आंकड़ा होना जरूरी है।