चौथी मंजिल: अब बिगड़ी 664 और 666 की हालत , मसला है सेक्टर 4 का 

अभी पंगा चल रहा 752/4 में कंस्ट्रक्शन का भी

कपिल चड्ढा, पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की डेवलप्ड सेक्टरों में चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन को मंजूरी देने की पॉलिसी जहां कुछ परिवारों को आने वाले समय में ‘खुशी’ देने वाली, वहीं उसी परिवार के पड़ोसियों के लिए जान की ‘आफत’ साबित हो रही है।
मसला चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन के चलते पड़ोसी घरों को होने वाले नुकसान का है। याद दिला दें कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पंचकूला स्थित इस्टेट आॅफिस में पिछले दिनों सेक्टर 4 में मकान नंबर 752 में चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन को लेकर सीएम विंडो पर दी गई शिकायत के आधार पर अलॉटी को नोटिस देते हुए मौके पर काम रुकवा दिया था। इस बाबत पंचकूला सिटी न्यूज7  ने 11 जुलाई के अंक में इस्टेट आॅफिस के हवाले से खबर भी प्रकाशित की थी।
अब मसला सेक्टर 4 में ही मकान नंबर 665 में चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन को लेकर खड़ा हो गया है। पड़ोस के मकान नंबर 664 और 666, दोनों की अलाइनमेंट हिल गई हैं। इस बाबत पीवीजीवी ग्रुप के संयोजक डॉ. बीएल टंडन ने बुधवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक महावीर कौशिक से मिलकर सारे घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही हवाला दिया पीवीजीवी ग्रुप की तरफ से चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन को लेकर जारी पॉलिसी पर तुरंत रोक के लिए बीते अर्से में चीफ सेक्रेटरी हरियाणा को लिखी गई चिट्ठी का भी। और…हवाला दिया मुख्य प्रशासक को लिखी गई चिट्ठी का भी, जिस पर उन्होंने इस्टेट आॅफिसर से सारे हालात का जायजा लेकर एक्शन टेकन रिपोर्ट उनके कार्यालय को देने के साथ-साथ शिकायतकर्ता (डॉ. टंडन) को भी देने का।
बुधवार को डॉ. टंडन ने इस्टेट आॅफिस में मकान नंबर 665 की कंस्ट्रक्शन को लेकर पड़ोस के मकान 664 और 666 को लेकर पेश आई परेशानी का हवाला देकर आग्रह किया है कि तुरंत एसडीओ सर्वे को मौके पर इंस्पेक्शन कर रिपोर्ट सब्मिट करने को कहा जाए, जैसा कि मुख्य प्रशासक कार्यालय ने निर्देश भी दे रखा है। गौरतलब है कि शहर में जहां कहीं भी चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन चल रही, या पूरी हो चुकी है, पड़ोस के परिवार दुखी हो रहे हैं। इस बात की पुष्टि खुद इस्टेट आॅफिस की सर्वे ब्रांच के एक अधिकारी ने भी पंचकूला सिटी न्यूज7  के साथ बातचीत में की है।
बता दें कि सेक्टर 16 में भी एक मकान की चौथी मंजिल बनने को लेकर बखेड़ा खड़ा हो रखा है। शिकायतों का दौर जारी है। पड़ोस के घर वालों को तकलीफ है कि इस्टेट आॅफिस के स्टाफ ने भी उनके साथ सौतेला बर्ताव किया, यहां तक कि सेफ्टी मेजर्स, जो सुनिश्चित किए जाने जरूरी थे, उन्हें भी सुनिश्चित नहीं कराया।
मकान नंबर 664 की निवासी सुखदेव राज पब्बी का कहना है कि जब से पड़ोस के प्लॉट पर चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन पूरी हुई, वे बुरी तरह से डिस्टर्ब हैं। अब तो हालत ये है कि रात को सोते हुए भी डर लगता है कि कहीं मकान ढह न जाए। वजह ये है कि उनके मकान की अलाइनमेंट जगह-जगह से बिगड़ चुकी है। कई जगह से क्रैक्स आ चुके और मकान एक तरफ टिल्ट हो गया है। डर है कि अगर कभी भूकंप आया तो उनका मकान ढह भी जाएगा। वे हालांकि अपने घर में रह रहे लेकिन खुद को हर वक्त अनसेफ महसूस करते हैं। बकौल पब्बी, पड़ोस का मकान 665 नंबर पहले सिंगल स्टोरी था, जिसे ढहाकर चार मंजिला बनाया गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के इस्टेट आॅफिस की सर्वे ब्रांच ने पड़ोस के 665 में कंस्ट्रक्शन के चलते अगर पड़ोसी घरों की सेफ्टी को गंभीरता से लिया होता तो शायद आज जिस हालत में वे लोग अपने घर में रह रहे, ऐसा न होता। पब्बी को शिकायत है कि पड़ोस के घरों के सेफ्टी को नजरंदाज किया गया, जोकि मानवता के लिहाज से सरासर गलत है।

पीवीजीवी ग्रुप ने चीफ सेक्रेटरी को लिखा था कि चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन डेवलप्ड सेक्टरों में एलाओ करना सरासर गलत कदम है। इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। यह पॉलिसी नए डेवलप होने वाले सेक्टरों में लागू हो तो बेहतर होगा। पुराने बसे सेक्टरों में नीवें भी उसी लिहाज से बनी हुर्इं, सो जब भी कोई चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन करेगा तो पड़ोसी घरों को नुकसान होने का डर रहेगा ही। यूं भी डेवलप्ड सेक्टरों की जोनिंग में बदलाव नियमों का उल्लंघन है। 

 

डेवलप्ड सेक्टरों में चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन को जब अप्रूव किया जाना था, तत्कालीन मुख्य प्रशासक जे. गणेशन की अध्यक्षता में कई मीटिंगें हुर्इं। उनमें खुद प्राधिकरण के कुछ सीनियर आॅफिसर्स ने ये बात मुख्य प्रशासक के ध्यान में लाई थी कि ढाई मंजिल मकानों के प्रावधान अनुसार हर तरह की सर्विसेज़ लेड हैं, लिहाजा चौथी मंजिल की कंस्ट्रक्शन एलाओ करने से कई तरह की दिक्कतें पेश आएंगी, लेकिन सब नजरंदाज किया गया।

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