नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) में काम करने वालों के लिए उनके PF को लेकर बेहद जरूरी खबर है. EPFO के स्ट्रक्चर में बदलाव किया जा सकता है. दरअसल श्रम मंत्रालय (Labour Ministry) के शीर्ष अधिकारियों ने लेबर से जुड़ी संसदीय समिति को एक सुझाव दिया है.  अधिकारियों का कहना है कि ईपीएफओ (EPFO) जैसे पेंशन फंड को आगे जारी रखने और ज्यादा व्यावहारिक बनाए रखने के लिए मौजूदा ढांचे में बदलाव करना होगा.

संसदीय समिति को दिए गए सुझाव में कहा गया है कि ‘Defined benefits’ के बजाय ‘Defined contributions’ का सिस्टम लागू किया जाए. अभी EPFO पेंशन की न्यूनतम सीमा तय है, यह एक तरीक से ‘efined benefits’ मॉडल है. Defined contributions सिस्टम को अपनाने पर पीएफ सदस्यों को उनके अंशदान यानी के मुताबिक बेनेफिट मिलेगा, यानी जितना योगदान उतना ही फायदा.

मीडिया रिपोर्ट्स में छपी खबर के मुताबिक अभी EPFO के पास 23 लाख से ज्यादा पेंशनर्स हैं, जिनको हर महीने 1000 रुपये पेंशन मिलती है. जबकि पीएफ में उनका अंशदान इसके एक चौथाई से भी कम है. अधिकारियों का तर्क है कि अगर यही चलता रहा तो इसे भविष्य में सपोर्ट करना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए defined contributions की व्यवस्था को अपनाना होगा ताकि इसे ज्यादा व्यावहारिक बनाया जा सके.