Panchkula Special

पीरमुछल्ला के रास्ते घग्गर नदी पर पुल बनना आसान नहीं

 

लोकेश चड्ढा, पंचकूला। यहां सेक्टर 20/21 की डिवाइडिंग रोड से आगे पीरमुछल्ला के रास्ते घग्गर नदी पर पुल बनाकर सेक्टर 25/26 को सीधा लिंक करने का जो प्लान हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बना रहा है, आसानी से सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा। वजह साफ है कि हाल ही में पुल को एप्रोच देने के लिए जो सड़क प्लान की गई, करीब 1300 मीटर लंबी और इसमें 980 मीटर जमीन पंजाब सीमा की है। उसमें भी वन विभाग पंजाब की जमीन आड़े आ रही है। इससे पहले प्राधिकरण ने एप्रोच रोड का जो प्लान बनाया गया, वह 1080 मीटर लंबी और उसमें 780 मीटर जमीन पंजाब सीमा में थी। इसमें भी वन विभाग पंजाब की जमीन आ रही थी।
जानकारों का मानना है कि वन विभाग की जमीन मिलना आसान नहीं, इसीलिए पुल की एप्रोच रोड को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एक प्राइवेट एजेंसी को हायर करके नए सिरे से प्लान किया है लेकिन बात सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही। वजह साफ है कि 300 मीटर लंबे पुल का मात्र 100 मीटर ही हरियाणा सीमा में यानी, 200 मीटर पुल भी पंजाब एरिया में बनेगा।
हरियाणा में सरकार भाजपा की और पंजाब में कांगे्रस की है। ऐसे में पंजाब सरकार का हरियाणा सरकार को आसानी से सहयोग दे देना, किसी को हजम नहीं हो रहा। वजह भी साफ है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने जो पुल प्लान किया, उसका फायदा भी मुख्य रूप से पंचकूलावासियों, यानी हरियाणा को मिलना है। इस पुल को बनाने का फैसला भी मुख्यमंत्री हरियाणा की घोषणा के तहत लिया गया और ऐसे में पंजाब सरकार हरियाणा के मुख्यमंत्री की घोषणा को सिरे चढ़ाने में कितनी संजीदगी के साथ रुचि लेगी, बड़ा प्रश्न चिह्न है। कुल मिलाकर नए पुल का प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।
जानकारों का मानना है कि घग्गर नदी पर प्लान किया गया यह तीसरा पुल ‘इंटर स्टेट’ मसला है। अभी तो इसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर प्लान कर निपटाने का प्रयास कर रहा, लेकिन यह हरियाणा के सीएम की मार्फत पंजाब के सीएम तक भी जाएगा। आगे पंजाब के सीएम आॅफिस की ‘स्वीट विल’ पर निर्भर करता है कि वे हरियाणा की प्रोपोजल को कितना तवज्जो देते हैं।
गौरतलब है कि पुल के लिए 53 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बन तो चुका लेकिन अभी न तो मंजूर हुआ और न ही इसके लिए पैसा अरेंज हो पाया है। प्राधिकरण ने पैसा टाउन प्लानिंग हरियाणा से ‘ईडीसी’ के तहत मांग रखा है। अगर पैसा प्राधिकरण खर्च करेगा तो वसूली प्लॉट होल्डर से करनी पड़ेगी जोकि आसान नहीं है। एस्टीमेट को मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग ने मंजूरी देनी है।