Panchkula Special

हर घर में ‘बम’, फट सकता है कभी भी

gudiyaकपिल चड्ढा, पंचकूला। हर घर में ‘बम’ रखा, जो कभी भी फट सकता है। यह बात आपको पढ़ने व सुनने में खटकेगी जरूर, लेकिन है सही। जी हां, एलपीजी गैस सिलेंडर हर घर में और यह बम जैसे बारूद की ताकत रखता, जो किसी अच्छे-खासे मकान को मिनटों में तबाह कर सकता है। इस बात का जीवंत उदाहरण पंचकूला के सेक्टर 10 में प्लॉट नंबर 702 पर बने मकान का आपके सामने है।
अजीत चौधरी का यह मकान बीते बुधवार की रात गैस सिलेंडर लीक होने से लगी आग के बाद धमाके से ढह गया। यानी, छत समेत घर का अधिकांश ढांचा मलबे के ढेर में बदल गया। धमाका भी ऐसा कि 9 लोग चपेट में आ गए, जिनमें से 7 की अब तक इलाज के दौरान मौत तक हो चुकी है। जाहिर है कि हादसा साधारण नहीं। इसी हादसे के शिकार दो और लोग अभी उपचाराधीन हैं।
मृतकों में अजीत चौधरी खुद भी शामिल, जो पड़ोसियों द्वारा अपने घर में रसोई गैस की लीकेज की शिकायत मिलने पर बाजार से अकेले घर लौटे थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य बाजार में ही थे। जानकारी अनुसार, अजीत चौधरी ने ज्यों ही घर का मेन दरवाजा खोलकर लाइट स्विच आॅन की, जोरदार धमाके के साथ घर में आग लग गई। जाहिर है कि एलपीजी गैस का गुब्बार पूरे घर में फैल चुका था, जो लाइट स्विच आॅन होते ही बिजली की हल्की सी चिंगारी मिलते ही शोलों मेें बदल गया।
जब तक चौधरी कुछ समझ पाते या बचाव में कुछ कर पाते, बना-बनाया घर जोरदार धमाके के साथ ढह गया। धमाका इतना जोरदार था कि पड़ोस में कई घरों के शीशे भी चटक गए। थोड़ी देर में ही फायर ब्रिगेड व प्राकृतिक आपदा से निपटने वाले कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए लेकिन तब तक चौधरी समेत 9 लोग इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में पहुंच चुके थे। जिस किसी ने अजीत चौधरी के मकान को ढहा हुआ देखा, पहली बारगी भरोसा नहीं किया कि किचन में रखा एलपीजी गैस का सिलेंडर इस कदर विस्फोटक हो सकता जो पक्के बने घर को तबाह करने की ताकत रखता है।
यहां सेक्टर 10 के मकान नंबर 702 में सिलेंडर फटने से लगी आग से ढहे 10 मरले के घर की घटना पंचकूला-चंडीगढ़ इलाके में अपने किस्म की पहली है। मात्र 14.2 किलो एलपीजी गैस से भरा सिलेंडर एक अच्छे-खासे घर को तबाह कर गया। पर… सबको मानना ही पड़ा और मानना पड़ेगा कि गैस सिलेंडर, जो हमारी रोजमर्रा की खाने-पकाने की जरूरतें पूरी करता, थोड़ी सी लापरवाही होने पर जान-माल का भारी नुक्सान भी कर सकता है। लिहाजा, हम सब को सबक लेना ही होगा कि एलपीजी सिलेंडर से गैस की लीकेज को सहजता से न लें। जब कभी घर से बाहर जाएं तो सिलेंडर का रेगुलेटर आॅफ कर दें। संभव है कि रेगुलेटर आॅफ के बावजूद भी सिलेंडर से गैस की लीकेज होती रहे। ऐसे में बेहतर होगा कि जिस सिलेंडर से गैस लीक होने की जरा सी भी गुंजाइश महसूस हो, उस सिलेंडर को सील/ढक्कन लगाकर घर के खुले बरामदे में रख दें और साथ ही संबंधित गैस एजेंसी को सूचित कर गैस की लीकेज को दूर करवाएं। कोशिश करें कि सिलेंडर का रिफिल अधिकृत गैस एजेंसी से ही लें। यानी, राह चलते वेंडर से रिफिल न लें, क्योंकि हो सकता है कि वेंडर का दिया सिलेंडर चोरी की गैस से भरा हो जो तकनीकी तौर पर भी ‘अनफिट’ हो।
हो सकता है कि सिलेंडर की ‘गास्केट’ लूज होने की वजह से गैस लीक हो रही हो, जो मात्र 5-10 रुपए की लागत से दूर हो सकती है। इसे सहजता से नहीं लेना चाहिए। काश! अजीत चौधरी के यहां गैस लीकेज को सहजता से न लिया जाता और उनका घर ढहने से बच जाता। बात यह भी उठेगी कि अजीत चौधरी के घर में सिलेंडर से गैस की लीकेज अचानक शुरू हुई हो, पर… संभव है कि लीकेज पहले से हो रही, लेकिन कम थी। तब किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। ऐसे में आप गैस के सिलेंडर से निकलने वाली हल्की सी भी स्मेल को गंभीरता से लें, वर्ना कभी भी किसी भी घर में रखा रसोई गैस का सिलेंडर ‘बम’ बनकर फट सकता, जैसे कि अजीत चौधरी के यहां हुआ है।

त्वरित टिप्पणी
हादसे की वजहें जानने को एसआईटी करे जांच
अजीत चौधरी के मकान नंबर 702/10 में घटी घटना का चौतरफा विश्लेषण होना जरूरी है ताकि हादसे के कारणों की सही तस्वीर सामने आ सके, क्योंकि यह घटना साधारण नहीं है। बना-बनाया घर ढह गया और 7 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसा हादसा भविष्य में किसी परिवार के साथ पेश न आए, इसके लिए राज्य सरकार को कुछ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स की ‘एसआईटी’ गठित कर डिटेल्ड जांच करानी चाहिए। यह जांच, विश्लेषण के तौर पर हो ताकि ठोस कुछ निष्कर्ष निकले और उन्हें जरूरत अनुसार हुडा समेत अन्य अथॉरिटीज़ अपने अधिकार क्षेत्र में बनने वाले मकानों/भवनों के लिए लागू करें ताकि भविष्य में कभी अजीत चौधरी के घर जैसा कोई घर न ढहे और किसी घर में मौत न हो।
इस संदर्भ में पंचकूला सिटी न्यूज7 का सुझाव रहेगा कि पंचकूला में हुडा को चाहिए कि गैस सिलेंडर रसोई घर की बजाय रियर कोर्ट यार्ड (पिछले बरामदे) में रखने की अनिवार्यता लागू करे। जब तक ऐसा प्रावधान अमल में न आए, हर परिवार को चाहिए कि अपनी किचन/स्टोर, जहां एलपीजी सिलेंडर रखे हों, के नजदीकी विंडो को खुला रखें ताकि अगर कभी तकनीकी कारणों से किसी भी सिलेंडर की गैस लीक हो तो उसका असर हवा में जाए, न कि घर के अंदर गुब्बार के तौर पर जमा हो, जो बाद में किसी बड़े हादसे का कारण बन जाए। आप सब के ध्यान में लाना जरूरी है कि 2001 में पंचकूला के नाडा साहिब गुरुद्वारे से सटी कुछ कच्ची पहाड़ियों और साथ लगती जमीन में दरारें आ गई थीं और तब उन दरारों का कारण जानने के लिए पीयू चंडीगढ़ समेत देश-विदेश के कई भू-वैज्ञानिक मौके पर पहुंंचे थे। सब लोग हैरान थे कि जमीन कैसे फट गई और जानने की कौशिश में रहे कि कितनी गहरी फटी है। अब अजीत चौधरी के यहां घटी घटना भी मामूली नहीं, क्योंकि सिलेंडर फटने की घटनाएं तो कभी-कभार सुनने को मिल जातीं, लेकिन 250 गज जमीन पर बना पक्का मकान सिलेंडर फटने से ढह जाए और 7 बेश-कीमती जानें चली जाएं, यह मामूली बात नहीं।
– कपिल चड्ढा, लेखक पंचकूला सिटी न्यूज7 का संपादक और हरियाणा सरकार से स्टेट अवॉर्डी जर्नलिस्ट है