Panchkula Special

हां बई। बारिशों में तो पानी रुकेगा ही

40 साल पहले बिछी कई लाइनें बंद हैं, तुरंत निकासी हो भी तो कैसे

कपिल चड्ढा, पंचकूला। जी हां। यह सच है कि पंचकूला में ड्रेनेज सिस्टम फ्लॉप है। कई जगह तो सीबीडी (सर्कुलर ब्रिक्स ड्रेन) टूटी हुई और कई जगह बंद पड़ी है। इसके अलावा कई जगह लाइनें ब्लॉक हैं। इसी कारण तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी नहीं हो पाती और सड़कें व चौक भर जाते हैं। नतीजतन बारिश रुकने के बाद भी आधे घंटे से एक घंटे तक लोग बरसाती पानी के चलते परेशान होते हैं।

elयहां बताना जरूरी है कि पंचकूला में ड्रेनेज सिस्टम के तहत 14 इंच से 90 इंच गोलाई की पाइपलाइनें बिछी हुई हैं। शहर के उत्तरी छोर (सेक्टर 1) और दक्षिणी छोर (इंडस्ट्रियल  एरिया फेस-1) के बीच भौगोलिक दृष्टि से ग्राउंड लेवल का अंतर करीब 90 फीट है, जो सड़कें व  गलियां घुमावदार होने की वजह से  महसूस नहीं होता। सेक्टर 19 की तरफ आने वाले शहर के पानी को आगे निकासी का रास्ता नहीं मिलता, क्योंकि बरसाती पानी का नाला अवैध कब्जों के चलते कई साल पहले बंद हो चुका है।

अब ऐसे हालात में विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ही कुछ कर सकते हैं। शहर को मानसून सीजन में डूबने से बचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से विशेष पैकेज मंजूर करवा सकते या फिर सांसद रत्न लाल कटारिया के एमपी लैड फंड से पैसा ले सकते हैं। यह भी सच है कि अब तक पंचकूला की नुमाइंदगी के लिए कई विधायक आए और गए। किसी ने भी शहर का ड्रेनेज मैनेजमेंट सुधारने को गंभीरता से नहीं लिया।

अब ज्ञानचंद गुप्ता से लोगों को आस बंधी है कि वे कुछ करें तो बात बने, वर्ना शहर तो यूं ही हर साल बरसात के दिनोंं में त्राहि-त्राहि करता रहेगा। बीते 19 जून, 12 जुलाई और 21 अगस्त को पंचकूला में हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के प्रशासनिक व इंजीनियरिंग विंग की कलई खोलकर रख दी, जिसने बरसात से पहले ड्रेनेज सिस्टम की साफ-सफाई को गंभीरता की बजाय सहजता से लिया। कई टेंडर तो बारिशों के मौसम में ही फाइनल किए गए।

पंचकूला सिटी न्यूज 7 का मानना है कि लोगों का विधायक ज्ञानचंद गुप्ता से आस रखना बहुत हद तक जायज भी है। आखिर आस उसी से की जाती, जिससे काम होने का भरोसा नजर आता है। विधायक ज्ञानचंद गुप्ता जी, आप भी बखूबी समझ रहे होंगे कि नगर निगम और हुडा के बूते में नहीं है शहर को डूबने से बचाना, क्योंकि ड्रेनेज मैनेजमेंट सिस्टम वीक तो है ही, बरसात के मौसम से पहले प्रॉपरली सफाई भी नहीं की जाती। जाहिर है कि जब तक सफाई ढंग से नहीं होगी, तो बरसाती पानी की निकासी भी सुनिश्चित नहीं हो सकती।

याद रहे कि हुडा को पंचकूला संभालते हुए 40 साल से ज्यादा बीत गए। अब एक साल से नगर निगम शहर का ड्रेनेज मैनेजमेंट अपने हाथ में लिए हुए है। मरहूम व अंबाला कैंट के निवासी डी.के. बंसल पंचकूला के पहले विधायक बने थे, लेकिन उन्होंने भी शहर का ड्रेनेज सिस्टम बड़ा करवाने को तवज्जो नहीं दी। हालांकि उनके कार्यकाल में भी कई बार पंचकूला पानी-पानी हुआ।

अब ज्ञानचंद गुप्ता, हरियाणा विधानसभा में शहर की नुमाइंदगी कर रहे हैं। वे शहर के ही रहने वाले और बरसाती पानी की समस्या को अपने विधायक बनने से पहले से ही समझते हैं। ऐसे में शहर के लोगों का विधायक ज्ञानचंद गुप्ता से आस लगाना काफी हद तक जायज भी है और उन्हें शहर के हित में पहले करते हुए आगे आना भी चाहिए। आखिर जो अधिकार व शक्तियां संविधान के तहत स्थानीय विधायक को प्राप्त हैं, वे किसी अधिकारी को भी नहीं, भले ही वह सरकार में कितने भी सीनियर पद पर पदासीन हों।

अब ऐसे हालात में विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ही कुछ कर सकते हैं। शहर को मानसून सीजन में डूबने से बचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से विशेष पैकेज मंजूर करवा सकते या फिर सांसद रत्न लाल कटारिया के एमपी लैड फंड से पैसा ले सकते हैं। यह भी सच है कि अब तक पंचकूला की नुमाइंदगी के लिए कई विधायक आए और गए। किसी ने भी शहर का ड्रेनेज मैनेजमेंट सुधारने को गंभीरता से नहीं लिया।