अकेले एचएसवीपी का स्टाफ ही जुटा रहता हल्के-फुल्के एन्क्रोचर्स को खदेडऩे में
सिटी न्यूज7/पंचकूला। उफ्फ! स्थानीय विधायक और हरियाणा विधानसभा के स्पीकर पंचकूला को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए कई तरह से प्रयास कर रहे लेकिन शहर में एन्क्रोचर्स को खदेडऩे के मामले में एचएसवीपी, नगर निगम और पुलिस में तालमेल नहीं है।
इन दिनों थोड़ी-बहुत एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव अकेले एचएसवीपी के बूते चल रही है। ऊपर से विडंबना यह है कि एचएसवीपी के पास एंन्क्रोचर्स का सामान ढोने के लिए एक पुराना ट्रक और वो भी खराब चल रहा है। एक छोटी जीप है, जो नाकाफी रहती है। नतीजतन, हल्का-फुल्का ऑपरेशन ही चलाया जाता है।
यहां गौरतलब है कि जिले के डीसी मुकेश आहूजा ने पिछले महीने तीन मेंबरी कमेटी का गठन किया था, जिसकी जिम्मेदारी थी पंचकूला को एन्क्रोचमेंट फ्री बनाना लेकिन वो कमेटी भी ‘डमी’ साबित हो रही है। वजह साफ है कि डीसी ने पुलिस महकमे, एचएसवीपी और नगर निगम से तालमेल बिठाकर एन्क्रोचर्स के खिलाफ मुहिम छेडऩे को कहा था लेकिन वो दिन अब तक नहीं आया। यही वजह है कि शहर में जहां-जहां भी एन्क्रोचर्स को खदेड़ा गया था, फिर से एन्क्रोचर्स लौटने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ी समस्या सेक्टर 20 की है। सड़कों पर रेहड़ी-फड़ी वाले एन्क्रोचर्स काबिज रहते ही, रोड बम्र्स और पार्किंग एरिया में भी धड़ल्ले से कब्जे किए जाते हैं।
गौरतलब है कि बीते अर्से में सरकारी जमीन पर ‘दबंगई’ दिखाते हुए काबिज रेहड़ी वालों को जिस तरह से सरकारी नियम-कायदों का हवाला देकर खदेड़ा गया, इसके लिए पंचकूला सिटी न्यूज7 की नजर में प्रभारी एमपी शर्मा (एसडीओ) और मान सिंह (सुपरवाइजर) बधाई के पात्र हैं। जाहिर है कि शहर को एन्क्रोचमेंट-फ्री बनाने के लिए सख्ती जरूरी है, वर्ना तो…शहर कभी भी स्मार्ट सिटी नहीं बन सकता, हालांकि शहरवासी पंचकूला को स्मार्ट सिटी देखने के लिए लालायित हैं।
बताना जरूरी है कि ज्ञानचंद गुप्ता पंचकूला को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए ‘पंचकूला डेवलपमेंट एडवाइजरी कमेटी’ का भी गठन कर रखा है। शहर को एन्क्रोचमेंट-फ्री बनाना सबसे पहले जरूरी, क्योंकि इसी से शहर का ‘चेहरा-मोहरा’ खराब होता है।
ज्ञानचंद गुप्ता ने कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे पंचकूला को एन्क्रोचमेंट-फ्री बनाकर रहेंगे। इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस, एचएसवीपी और नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी की लेकिन नतीजे अभी तक संतोषजनक नहीं मिले हैं। जाहिर है कि पहले तालमेल जरूरी है।
शाबाशी तो बनती है एचएसवीपी के एमपी शर्मा और मान सिंह के लिए, जो ईओ ममता शर्मा के मार्गदर्शन में जुटे रहे कई दिन तक एन्क्रोचमेंट हटाने में

  • बेहतर नतीजे तभी मिल सकते हैं, जब एचएसवीपी के साथ नगर निगम और पुलिस भी खुलकर ‘एन्टी एन्क्रोचमेंट ड्राइव’ में साथ दें।
  • एन्क्रोचर्स का जब्तशुदा सामान जल्द ना लौटाया जाए।
  • डीसी लेवल पर गठित तीन मेंबरी कमेटी एन्क्रोचमेंट के ‘वॉल्यूम’ का रेगुलर सुपरविजन करे।
  • राजेंद्र कटारिया, पंचकूला के डीसी रहते जिस तरह से एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव का नेतृत्व करते रहे, वैसे ही मुकेश आहूजा भी कभी-कभार टाइम निकालें तो निचले स्टाफ का उत्साह बढ़ेगा।