Chandigarh

षटतिला एकादशी- करें तिल दान व श्रीहरि विष्णु की उपासना: अंजू आनंद

षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। षट यानि छह  और तिला यानि तिल अर्थात तिल का छह प्रकार से उपयोग करना | इस दिन तिल के विशेष प्रयोग से हर मनोकामना पूरी हो सकती है |

इस दिन काले तिलों के दान का विशेष महत्त्व है। शरीर पर तिल के तेल की मालिश, जल में तिल डालकर उससे स्नान, तिल जलपान तथा तिल पकवान की इस दिन विशेष महत्ता है। इस दिन तिलों का हवन करके रात्रि जागरण किया जाता है।

इस दिन छ: प्रकार के तिल प्रयोग होने के कारण इसे “षटतिला एकादशी” के नाम से पुकारते हैं। इस प्रकार मनुष्य जितने तिल दान करता है, वह उतने ही सहस्त्र वर्ष स्वर्ग में निवास करता है। इस एकादशी पर तिल का निम्नलिखित छ: प्रकार से प्रयोग किया जाता है-

1.तिल स्नान

2.तिल की उबटन

3.तिलोदक

4.तिल का हवन

5.तिल का भोजन

6.तिल का दान

इस प्रकार छः रूपों में तिलों का प्रयोग ‘षटतिला’ कहलाता है। इससे अनेक प्रकार के पाप दूर हो जाते हैं।

‘षटतिला एकादशी’ के व्रत से जहाँ शारीरिक शुद्धि और आरोग्यता प्राप्त होती है, वहीं अन्न, तिल आदि दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है।

माघ माह सनातन धर्म में नरक से मुक्ति और मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। माघ का महीना भगवान विष्णु का प्रिय महीना और एकादशी तिथि विश्वदेव की तिथि मानी गई है

एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु की उपासना से इंसान के समस्त बुरे कर्मों और पापों का नाश हो जाता है इस दिन श्रीहरि के साथ सभी देवताओं की कृपा बरसती है और  ऐसा अद्भुत संयोग केवल षटतिला एकादशी को ही मिलता है  इस दिन श्रीहरि और विश्वेदेवा की उपासना से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं |

आज के दिन भगवान श्रीहरि की उपासना से मुक्ति और मोक्ष का वरदान भी मिलता है |

आज मन का कारक चन्द्रमा जल तत्व की मोक्ष त्रिकोण राशि वृश्चिक में और आत्मा कारक सूर्य चन्द्र के नक्षत्र श्रवण में शनि के साथ योग करते हुए साथ ही देव गुरु बृहस्पति और असुरगुरु शुक्र का संबंध बन रहा है गृह नक्षत्रो की ये चाल मुक्ति और मोक्ष के मार्ग को उन्नत करेगी

कोर्ट कचहरी और मुकदमें में विजय प्राप्त करने के लिए एवं धन से संबंधित परेशानियों से राहत पाने के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा करें

नियमानुसार स्वस्थ व्यक्ति को निर्जला उपवास रखना चाहिए

षटतिला एकादशी व्रत में तिल के दान और सेवन का विशेष महत्व है तिल का उबटन लगाएं. जल में तिल डालकर स्नान करें

इस दिन गोबर, कपास और तिल का पिंड बनाकर उसका पूजन करें शाम के समय उसी पिंड से हवन करें |

यथासंभव “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ” मंत्र का जप करें रात में भगवान् विष्णु के सामने घी का एकमुखी दीपक जलाएं गंध, पुष्प, धूप दीप, ताम्बूल सहित विष्णु भगवान की षोड्षोपचार से पूजन करना चाहिए। उड़द और तिल मिश्रित खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाना चाहिए। रात्रि के समय तिल से 108 बार ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय स्वाहा इस मंत्र से हवन करना चाहिए। तिल के व्यंजनों का भोग लगाएं  तिल का प्रसाद खुद खाएं और लोगों में भी बांटें

~ Anju Anand(Jyotish Acharaya)

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