Chandigarh

राहू आया सिंह राशि में – विश्व राजनीति और व्यापार पर असर: अंजु आनंद

सूर्य के राशि सिंह में राहु देव का आगमन विश्व राजनीति और व्यापार पर क्या असर होगा चंडीगढ़ के ज्योतिष आचार्या अंजु आनंद के अनुसार, 18  माह तक अपनी राशि कन्या में विचरण करने के पश्चात 30  जनवरी 2016 को राहु का प्रवेश सूर्य अधिष्ठित राशि सिंह में होगा और अगले 18 मास सिंह में ही रहेंगे और अगस्त तक बृहस्पति के साथ घनिष्ठ संयोजन के चलते गुरु चांडाल दोष का असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिलेगा | सिंह राशि में भी राहु देव शुरुआत कुछ समय सूर्य के नक्षत्र उत्तरफाल्गुनी में होंगे | नवांश में भी बृहस्पति एवं शनि के साथ घनिष्ठ संयोजन होगा तो यह समय राजनीतिक गलियारों में उठा पटक का रह सकता है| अनाज के दामों में वृद्धि होने से महंगाई बढ़ेगी| कृषकों को मानसिक चिताएँ रहेंगी |

 ज्योतिषाचार्या अंजु आनंद का कहना है कि ज्योतिषीय ग्रंथ भद्रबाहु संहिता के अनुसार सिंह का राहु होने से सुभिक्ष होता है अर्थात खाने पीने कि वस्तुओं की कमी नहीं होती| व्यापारियों को लाभ होता है| सौंठ,  धनिए,  सेंधा नमक पीपल आदि वस्तुओं के व्यापार में लाभ होता है| लेकिन अन्न के व्यवसाय में हानि होती है गुड, चीनी, और घी के व्यवसाय में समार्घता रहती है इसलिए राहु के सिंह राशि में संचरण से इन सभी व्यवसायों से जुड़े जातकों के लिए अगले 18 मास के लिए समय लाभदायक रहने वाला है |

राहु के सिंह में आने से तेल के भावों में तेज़ी आने की संभावना रहती है इसलिए जो जातक तेल के व्यवसाय से जुड़े हैं उनके लिए समय अच्छा होगा |

सिंह का राहु देश में राजनीतिक स्तिथि को सुदृढ़ करता है देश के अंदर नए विचारो और नए भावों की प्रगति होती है |

कला क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी सिंह का राहु शुभ संकेत लेकर आएगा कलाकारों को सम्मान मिलेगा तथा कला का सर्वांगीण विकास होगा |

साहित्य के क्षेत्र में उन्नति होगी साहित्यकारों के लिए राहु का सिंह में संचरण शुभ होगा

इस समय में देश शिक्षा और संस्कृति में प्रगति करेगा

मार्च 2016  में लगने वाले सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र तथा केतु कुम्भ राशि में होंगे और इनपर शनियुत मंगल की दृष्टि भी होगी  अतः उस समय में जनजीवन उपयोगी वस्तुएं मंहगी होगी | कहीं कहीं अकाल की स्तिथि भी बनेगी प्रधान नेताओं के लिए कष्टकारी समय रहेगा |

विश्व में कही सत्ता परिवर्तन के भी योग बनेंगे |

लेकिन “बृहत संहिता” के अनुसार इस युति पर बृहस्पति की दृष्टि होने से भारत में उपरोक्त नेष्टफल निष्क्रिय हो जाते हैं