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मकर संक्रांति 2016 – जन्मपत्रिका में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने का उत्तम समय : अंजु आनंद 

मकर संक्रांति पर्व का सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्वरूप सूर्यसाधना है।

“सूर्य आत्मा जगत्स्तथुषश्च – ऋग्वेद” -अर्थात भगवान भास्कर सम्पूर्ण चराचर की आत्मा हैं

हमारे सभी धार्मिक ग्रंथों विशेषतः वेदों, पुराणों, उपनिषदों आदि में सूर्य भगवान को जगत की आत्मा बताया गया है। सूर्य हमारे प्रत्यक्ष देवता हैं। वेदों में सूर्य उपासना को सर्वोपरि बताया गया है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना असम्भव है| धर्म,  अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त करने के लिए सूर्य की उपासना करना हर मनुष्य के लिए नितांत जरूरी है। इसीलिए सभी सूर्य-संक्रांतियों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मकर संक्रांति का गुणगान हमारे धर्मग्रंथों में किया गया है

सूर्य कृपा के लिए हमारे वेद, पुराण, शास्त्रों में सूर्य भगवान की पूजा, अर्चना, उपासना, वंदना, आराधना के अनेक विधान दिये गये हैं।

जप, तप, व्रत व दान के अनेक उपाय हैं जिनके माध्यम से सूर्य साधना सम्पन्न की जा सकती है।

(1) मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल अभ्यंग स्नान करना चाहिए। लाल वस्त्र पहनकर एवं लाल आसन बिछाकर सूर्य साधना सूर्योदय से सूर्यास्त तक सम्पन्न करना चाहिए।

निम्न मंत्रों का जाप श्रद्धानुसार कुल 28 हजार संख्या में करना चाहिए।

बीज मंत्र:-

ऊँ घृणि सूर्याय नमः

तांत्रिक मंत्र:-

ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

वैदिक मंत्र:-

ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतम्मर्तंच।

हिण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन।

पुराणोक्त मंत्र:-

जपाकुसुम संकाषं काष्यपेयं महाद्युतिम।

तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्।।

जल में चंदन, अक्षत व लाल फूल डालकर पूर्वाभिमुख होकर निम्न मंत्र से उदयमान सूर्य भगवान को अघ्र्य प्रदान करें:-

ॐ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।

अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।

ॐ सूर्याय नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ नमो भास्कराय नम:।

अर्घ्य समर्पयामि।।

सूर्य से संबंधित स्तोत्र, कवच, सहस्त्र नाम, द्वादशनाम, सूर्य-चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए।

सौर सूक्त, सूर्य अथर्वशीर्ष,  सूर्याष्टकम्,  आदित्यहृद्य स्तोत्र का पाठ अति उत्तम है।

सत्यनारायण व्रत कथा पाठ एवं हरिवंशपुराण का पाठ करना या करवाना हितकर है।

अगर आप सूर्य यंत्र स्थापित करना चाहते हैं तो इस महापर्व पर अपने पूजाघर में सिद्ध सूर्य यंत्र को स्थापित करें।

सूर्य रत्न माणिक व उपरत्न पहनने का तथा सूर्य के अंक यंत्र को गले में धारण करने का यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।

सूर्य मंदिर जाकर सूर्य मूर्ति के दर्शन करना पूजन-अर्चन करना एवं दान आदि करना कल्याणकारी है।

उत्तम स्वास्थ्य के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें कुछ लोग मकर संक्रांति पर उपवास करते हैं मान्यता है कि यशोदा जी ने जब कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था तब सूर्य देवता उत्तरायण काल में पदार्पण कर रहे थे और उस दिन मकर संक्रांति थी। कहा जाता है तभी से मकर संक्रांति व्रत का प्रचलन हुआ।

कहा जाता है जो व्यक्ति संक्रांति पर तीन दिनों तक उपवास करता है और उसके उपरान्त स्नान करके  सूर्य की पूजा करता है, तो वह मनवांछित फल पाता है और सभी पापों से मुक्त हो जाता है। किंतु पुत्रवान व्यक्ति को रविवार,  संक्रान्ति एवं ग्रहणों पर उपवास नहीं करना चाहिए