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प्रदोष व्रत – संतान प्राप्ति के लिए कैसे मनाये भगवन शिव को – अंजु आनंद ज्योतिषचार्या

त्रयोदशी तिथि में सायं काल को प्रदोष काल कहा जाता है। प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में  नृत्य करते हैं, इस तिथि को संध्या समय सभी देव गण कैलाश पर एकत्रित होते हैं और शिव आराधन करते हैं, जिससे इस व्रत को करने वाले साधक को समस्त सुखों  और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है | जो भी लोग अपना कल्याण चाहते हों उन्हें यह व्रत रखना चाहिए। प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है।

भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते, रुद्राय नीलकंठाय शर्वाय शशि मौलिने ||

उग्रयोग्राघनाशाय भीमाय भय हारिने ईशानाय, नमस्तुभ्यं पशुनाम पतये नमः ||

प्रदोष पांच प्रकार के होते हैं :

1) नित्य प्रदोष: प्रतिदिन गोधूलि काल (शाम का समय) सूर्यास्त से 3 घटी (72 मिनट) बाद जब आकाश में तारे दिखने लगते हैं उस समय को नित्य प्रदोष कहा जाता है |

2) पक्ष प्रदोष: शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का संध्या काल पक्ष प्रदोष कहलाता है |

3) मास प्रदोष: प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की संध्या को मास प्रदोष कहा जाता है |

4) महा प्रदोष: प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी की संध्या और जिस दिन शनिवार का भी संयोग हो (अर्थात शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष)

5) प्रलय प्रदोष: वह समय जब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड शिव में विलीन हो शिव से ही एक हो जाता है (अर्थात महाप्रलय काल)

देवादि देव महादेव समस्त कामनाओं को पूर्ण कर प्रत्येक सुख प्रदान करने वाले देव हैं जो शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं | अतः त्रयोदशी और चतुर्दशी के योग के समय अर्थात त्रयोदशी को संध्या समय भगवान शंकर की पूजा का महत्व और भी अधिक हो जाता है |

सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है। वार के अनुसार यह व्रत विशेष फलदायी कहा गया है  प्रदोष व्रत के विषय में गया है कि अगर

  • आरोग्य प्राप्ति और आयु वृद्धि के लिए रविवार के दिन रवि (अर्क अथवा सूर्य ) प्रदोष
  • ऋण मुक्ति के लिए भौम (मंगल ) प्रदोष- ऋण मोचन यानि मंगलवार का प्रदोष व्रत करना चाहिए
  • सकल कामना पूर्ति, शांति और सुरक्षा के लिए सोम प्रदोष का व्रत करना चाहिए
  • सर्व कामना पूर्ति के लिए बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए
  • शत्रु नाश, पितृ तृप्ति और भक्ति वृद्धि के लिए बृहस्पति प्रदोष
  • सौभाग्य वृद्धि, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों पदार्थों की प्राप्ति के लिए शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए
  • शनि प्रदोष व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है

शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत का भी बड़ा महत्व है। यह संतान प्राप्ति हेतु संजीवनी का कार्य करता है | शनिवार के दिन जब त्रयोदशी तिथि पड़ती है तब इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। प्रदोष व्रत जब शनिवार को पड़े तो उस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही शनि देव की भी कृपा भी सुलभ प्राप्त होती है । प्रदोष व्रत त्रयोदशी क दिन रखा जाता है। पुराणों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।

कुंडली में शनि जनित दोषों से मुक्ति पाने के लिए शनि प्रदोष में भगवान को तिल का भोग अर्पित करना चाहिए साथ ही गरीबों को भी भोग खिलाना चाहिए। काले छाते व जूते का दान करना चाहिए।

पुराणों के अनुसार माना जात है कि इस अवधि के बीच भगवान शिव कैलाश पर्वत में प्रसन्न होकर नृत्य करते है। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

आज ग्यारह बार दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में आ रही परेशानी में कमी आती है।

कार्यक्षेत्र में आ रही परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए तथा दुख, दुर्भाग्य और दरिद्रता से निश्चित छुटकारा पाने के लिए आज के दिन “ॐ खगेशाय प्रीं दारिद्र्य दुःख दुर्भाग्य दहनाय नमः शिवाय प्रीं।।” मंत्र का जाप करें

सूर्यास्त के पश्चात पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाएं

व्रत करने वाले नर नारी को अहिंसा, सत्य वाचन, ब्रह्मचर्य (दैहिक और मानसिक दोनों प्रकार से ),  दया,  क्षमा, निंदा और ईर्ष्या न करना आदि नियमों का पालन करना अति आवश्यक है

अंजु आनंद ज्योतिषचार्या

9041020776