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पुण्य प्रदायिनी सोमवती अमावस्या – कालसर्प दोष एवं पितृ दोष से मुक्ति पाने का अवसर  (अंजु आनंद)

सोमवार को अमावस्या पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है इसे मौनी अमावस भी कहा जाता है| पुराणों में सोमवती अमावस्या का बहुत महत्त्व बताया गया है सोमवती अमावस्या वर्ष भर में एक या दो बार ही मिलती है और माघ मास की सोमवती अमावस्या अत्यंत दुर्लभ होती है|

सोमवती अमावस्या को अन्य अमावस्या से अधिक पुण्य कारक मानने के पीछे भी शास्त्रीय और पौराणिक कारण हैं। सोमवार को भगवान शिव और चंद्रमा का दिन कहा गया है। सोम यानी चंद्रमा। अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का सोमांश यानी अमृतांश सीधे-सीधे पृथ्वी पर पड़ता है।

तंत्र शास्त्र के मतानुसार अमावस्या के दिन किए गए उपाय, जाप, दान और पूजा अर्चना अत्यन्त प्रभाव-शाली होती है और इसका फल भी शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है। इस दिन की पूजा से पितृों की आत्मा को शांति और पति की लंबी उम्र जैसे कई लाभ मिलते हैं |

निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सोमवती अमावस्या / अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत

पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा समझाते हुए कहा है, ‘हे धर्मराज, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने तथा पीपल वृक्ष एवं भगवान विष्णु की पूजा एवं पीपल वृक्ष की प्रदक्षिणा करने वाले मनुष्य के समस्त दैहिक, दैविक, भौतिक ताप एवं कष्ट समाप्त हो जाते हैं और वह समस्त दु:खों से मुक्त होकर स्वस्थ, सुखी, समृद्ध जीवन यापन करते हैं। साथ ही उनके पितरों को भी शांति प्राप्त होती है। यह एक उत्तम अवसर होता है पितृ दोष से मुक्ति पाने का |

हिन्दू धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन पीपल की सेवा, पूजा, परिक्रमा का विशेष महत्व है।

जो नर नारी व्रत करना चाहते हैं उन्हें स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर पीपल वृक्ष के नीचे पूर्वाभिमुख बैठकर इस मंत्र से संकल्प लेना चाहिए

मम अखिल पाप प्रशमानार्थं धन-धान्य, ऐश्वर्य, कीर्ति, वृद्धयर्थं अखंड सौभाग्य प्राप्त्यर्थं

श्री हरि विष्णु प्रसन्नार्थं, सकल कामना सिद्धये च सोमवती अमावस्या व्रतं अहं करिष्

तत्पश्चात पीपल वृक्ष को सात बार कच्चे सूत से लपेटकर उसके मूल भाग में भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करके पीले वस्त्र, पीला अक्षत, चंदन, पीले पुष्प, धूप-दीप,  दूध,  दही नैवेद्यादि समर्पित करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

पीपल पर वास करने वाले सभी देवों का ध्यान कर अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि दुर्गुणों को दूर करने की कामना करते हुए निम्न मंत्र से प्रदक्षिणा करनी चाहिए। इस दौरान  “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”  मंत्र का भी जप करना चाहिए।  तत्पश्चात पीपल वृक्ष की निम्न मंत्र से प्रदक्षिणा करें

यानि कानि पापानि जन्मांतर वृतानि च।

तानि सर्वाणि नश्यंति प्रदक्षिणे पदे पदे।

सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए इस व्रत का विशेष महत्त्व है इस दिन जो स्त्री तुलसी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है ।

इस दिन प्रातः पीपल वृक्ष के पास जाकर “ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः” का जप करते हुए पीपल वृक्ष को दो जनेऊ एक वृक्ष के लिए और दूसरा भगवान विष्णु के लिए अर्पित कीजिये साथ ही मिष्ठान का भोग लगाएं और 108 प्रदक्षिणा करें|

शास्त्रों के अनुसार पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव तथा अग्रभाग में ब्रह्मा जी का निवास है इसलिए पीपल की छाया से, स्पर्श करने से और प्रदक्षिणा करने से समस्त पापों का नाश,  अक्षय पुण्य, लक्ष्मी की प्राप्ति और आयु में वृद्धि होती है।

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभांगम्।

लक्ष्मीकातं कमल नयनं योगर्विद्यानगम्यम्। वंदे विष्णुं भव भय हरम् सर्व लोकैकनाथम्।

कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए 

सोमवती अमावस्या पर काल सर्प दोष शांति हेतु राहू केतु मन्त्र एवं नाग गायत्री मन्त्र का विधिवत जप अनुष्ठान व सर्प युगल जल विसर्जन कर काल सर्प दोष की शांति करवानी चाहिए। काल सर्प दोष शांति अनुष्ठान अपने घर, मंदिर,  गंगा तट आदि तीर्थ स्थानों पर कर सकते हैं ।

भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें पीपल पर मीठा जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें, धूप दीप जलाएं,  ब्राह्मणो को यथा शक्ति दान दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करें तो उन्हें निश्चित ही कालसर्प दोष से छुटकारा मिलेगा।

पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए

पितृ दोष एवं काल सर्प दोष शांति का सर्वोत्तम मुहूर्त है सोमवती अमावस्या सोमवती अमावस्या पर पितृ तृप्ति, प्रसन्नता हेतु गंगा स्नान, तर्पण,  अन्न,  जल,  वस्त्र,  शैय्या, गौदान करना एवं वट वृक्ष की सफेद सूत लपेटते हुए 11, 21, 51, या 108 परिक्रमा करना भी एक श्रेष्ठ उपाय है ।

पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए चावल और घी से बने लड्डू कौवों और मछलियों को खिलाएं

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए

सोमवती अमावस्या के दिन सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होकर शिव मंदिर में सवा किलो चावल अर्पित कर पूजन करें। पूजन पूर्ण होने पर यह चावल किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। अमावस्या पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से लक्ष्मी कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है।

गाय की सेवा करने से व्यक्ति को सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या पर यथाशक्ति गाय को हरी घास खाने को दें।

अमावस्या की शाम में किसी पीपल के नीचे दीपक लगाएं। पीपल की पूजा से कुंडली के कई प्रकार के दोष दूर होते हैं।

अमावस्या के दिन शाम के समय किसी भी हनुमान मंदिर जाकर  हनुमान चालीसा का पाठ करें। सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।

अंजु आनंद – 9041020776