टीचर नहीं करेंगे नॉन टीचिंग वर्क

चंडीगढ़। शिक्षक केवल शिक्षण पर केंद्रित रहें, इसके लिए दिल्ली सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। इसके तहत सरकार ने प्रधानाचार्यों/स्कूल प्रमुखों के अधिकार बढ़ा दिए हैं। अब प्रधानाचार्य या स्कूल प्रमुख अपने स्कूल में गैर-शिक्षण कार्यों के लिए कर्मचारियों की नियुक्तियां कर सकेंगे। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर दिया है।
ध्यान रहे कि हरियाणा व पंजाब सहित कई राज्यों में टीचर्स को नॉन टीचिंग वर्क के साथ सरकारी आदेशों की पालना करते हुए वोटर कार्ड, आधार कार्ड बनवाने में मदद जैसे कई ऐसे काम करने पड़ते हैं जिनका टीचर्स के साथ वास्ता नहीं।उप-मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक शिक्षकों से गैर-शिक्षण संबंधी काम लेना बच्चों और शिक्षकों दोनों के साथ अन्याय है। शिक्षकों का पूरा फोकस शिक्षा पर हो और वे ज्यादा रचनात्मक व बेहतर तरीके से यह काम कर सकें, हमारी यही कोशिश है। पहले हमने शिक्षकों को जनगणना के काम में न लगाए जाने का फैसला लिया था और अब हम दिशा में एक अन्य अभूतपूर्व कदम उठा रहे हैं।
शिक्षण के अलावा हर स्कूल के कागजी कामकाज को निपटाने के लिए भी शिक्षकों का ही सहारा लिया जाता है क्योंकि ऐसा काम करने वाले कर्मचारियों की भारी कमी है। अभी शिक्षकों को डायरी-डिस्पैच, विभिन्न तरह के बिल्स को तैयार करना और जमा करना, विभिन्न विभागों के साथ पत्राचार, रिकॉर्ड दुरुस्त करना, कैश बुक व सर्विस बुक मेनटेन करना और प्रधानाचार्य/स्कूल प्रमुख द्वारा दिए गए अन्य कार्य भी करने पड़ते हैं। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है।
इसका हल खोजने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानाचार्य/स्कूल प्रमुख को ऐसे कामों के लिए रिटायर्ड लोगों को रखने का अधिकार दे दिया है। दिल्ली सरकार/स्थानीय निकायों/केंद्र सरकार/अन्य राज्य सरकार/सैन्य सेवा या ऐसी किसी अन्य सेवा में लोवर डिवीजनल क्लर्क, अपर डिवीजनल क्लर्क, हेड क्लर्क और ऑफिस सुप्रिंटेंडेंट के पद से रिटायर्ड 65 साल से कम उम्र के स्वस्थ व्यक्तियों को इन कामों के लिए नियुक्त किया जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किए जाएंगे और उन्हें 25 हजार रुपये की कन्सालिडेटेड रकम दी जाएगी। प्रधानाचार्य/स्कूल प्रमुख द्वारा गठित कमेटी इनकी नियुक्ति करेगी।

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